Column/ बातें हैं बातों का क्या/ राजनीति प्रसाद

सन्नाटा तोड़ते कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं के स्वर

नई दिल्ली. इंडिया डेटलाइन. कांग्रेस की राजनीति में G-23 के नाम से जाने जा रहे असंतुष्ट या ‘संगठन के सुधारवादी’ चुप नहीं बैठे। चुप तो पार्टी का वर्चस्ववादी खेमा भी नहीं बैठा। ग़ुलाम नबी आज़ाद और कपिल सिब्बल लंबे-लंबे इंटरव्यू देकर पार्टी की रीति-नीति पर अंगुली उठाते रहे तो आलाकमान से जुड़े नेता उसकी किलेबंदी और इनकी घेराबंदी मजबूत करने में लगे रहे। निचले स्तर पर कार्यकर्ता और पदाधिकारी छोटे-छोटे वैध-अवैध हथियारों से हमला करते रहे। कपिल सिब्बल वक़ील हैं और सुप्रीम कोर्ट में पार्टी से जुड़े मामलों में हाज़िर होते रहे हैं सो अब अकाट्य दलीलें जनता की अदालत में उछाल रहे हैं। रविवार को उन्होंने कहा-यदि हमने गलती की तो हमसे सवाल किए जा सकते थे। लेकिन आप मुद्दों पर बात करने की बजाय चिट्ठी लिखने की टाइमिंग और हमने क्या लिख दिया-इस पर बात करते हो। आप खुद एक वजह हैं और उद्देश्य से नाइत्तफाकी जता रहे हैं। हमारी एक भी चिंता पर कार्यसमिति की बैठक में विचार नहीं किया। 

बुड्ढा दल को ठिकाने लगाने का राहुल प्लान

क्या कांग्रेस में बुड्ढा दल का ज़माना लदने जा रहा है? चिट्ठी लिखने वाले धुरंधरों को ठिकाने लगाने के लिए बुज़ुर्ग नेताओं को दरवाज़ा दिखाने की तैयारी हो चुकी है। किसी जमाने में कामराज योजना की तरह का प्लान लाकर 70 पार को हासिये पर बैठाया जाएगा। भाजपा के मार्गदर्शक मंडल का मॉडल कांग्रेस में लाया जाएगा। यह संकेत राहुल गांधी ने अपने खास युवा नेताओं के साथ संवाद में दिए। सिस्को वेबेक्स प्लेटफ़ॉर्म के एडमिन कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने यह बैठक बुलाई थी। इसमें राहुल ने खुलकर कांग्रेस में भारी बदलाव करने की बात कही। इस योजना में  ग़ुलाम नबी, अंबिका सोनी, अहमद पटेल, भूपिंदर हुड्डा, अशोक गेहलोत व अमरिंदर सिंह जैसे नेता तो अग्रिम पंक्ति से खिसक ही जाएँगे, दिग्विजय सिंह और कमलनाथ भी मार्ग ‘दर्शक’ बन जाएँगे।

10 जनपथ नहीं, तुग़लक़ रोड क्लब

इस हफ्ते कांग्रेस की चर्चा ज्यादा। असल में यह उसी का हफ़्ता था। G-23 के बाद नए-नए शब्द-पद आए। मसलन 23/23 यानी 23 असंतुष्ट नेताओं के खिलाफ 23 मदर टेरेसा क्रिसेंट यानी सोनिया गांधी के सबसे खास अहमद पटेल का घर। इसी तरह 10 जनपथ की जगह तुग़लक़ रोड क्लब चर्चा में आया। खबर थी कि अब तुगलक रोड निवास 10 जनपथ पर भारी है। यहाँ रहने वाला ‘शख़्स’ काफी कुछ तय कर रहा है। जाने-माने विश्लेषक मुकेश केशवन ने टेलीग्राफ़ के लीड आर्टिकल में लिखा कि सीडब्ल्यूसी को अब कांग्रेस वर्किंग कमेटी नहीं कहना चाहिए बल्कि यह सीडब्ल्यूसी ही है, जैसे विप्रो अब वेस्टर्न इंडिया पाम रिफ़ाइनरी आयल लि. नहीं है जो अज़ीम प्रेमजी के दादा ने स्थापित की थी। सीडब्लयूसी में निहित कांग्रेस और कमेटी-दोनों अब नहीं हैं। कांग्रेस नेहरू-गाँधी-इंदिरा गांधी की थी। 

‘गेस्ट आर्टिस्ट’ शशि थरूर 

लखीमपुर खीरी जिला कांग्रेस कमेटी ने जितिन प्रसाद को अपने बाप तक याद दिलाए तो केरल में शशि थरूर को पार्टी अध्यक्ष के साथ ही कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष के. सुरेश ने खरी-खरी सुनाईं। उन्होंने थरूर को अतिथि कलाकार बताते हुए कहा था कि वे राजनीतिज्ञ हैं ही नहीं। बोल थे-वे वैश्विक नागरिक हो सकते हैं लेकिन उन्हें अपनी मर्ज़ी के मुताबिक करना या बोलना नहीं चाहिए। लेकिन अब इन्होंने गलती मान ली। इनका असल ग़ुस्सा तिरुवनंतपुरम का हवाई अड्डा केन्द्र सरकार द्वारा उद्योगपति अडानी को थमाने पर थरूर द्वारा उसका समर्थन करने पर था। कांग्रेस अंबानी व अडानी को लेकर प्रधानमंत्री मोदी का विरोध कर रही है। 

तो अब अमेरिका में परिवारवादी राजनीति

अमेरिका की राजनीति में भी कुछ खास ख़ानदान सबसे बड़ी कुर्सी की शोभा बढ़ाते रहे हैं लेकिन ज्यादातर मामलों में किसी पिता ने पुत्र की सिफ़ारिश नहीं की। पुत्री की तो वहाँ की चुनाव व्यवस्था में बात ही नहीं की जा सकती। लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप इस जैसी कई परिपाटियों को तोड़ रहे हैं। वे अपनी बेटी इवांका को अगला राष्ट्रपति बनाने की बात कहते नजर आए। अपनी नामजदगी रैली के भाषण में विपक्षी दल की उपराष्ट्रपति उम्मीदवार कमला हैरिस पर हमला करते हुए जहाँ उन्हें नाकाबिल कहा, वहीं बेटी इवांका को राष्ट्रपति पद के लिए सुयोग्य बताया। 

कोलकाता से लंदन तक चलेगी बस

अगली मई से आप बस में बैठकर कोलकाता से लंदन जा सकते हैं। गुरुग्राम के दो बस ऑपरेटरों ने ऐसी बस चलाने की योजना बनाई है। यह बस 18 देशों में से होकर 20000 किलोमीटर का फासला तय करेगी। इसे कोलकाता से लंदन पहुंचने में 45 दिन लगेंगे। इन लोगों के इस हौसले की वजह वह खबर है जिसमें बताया गया था कि 1950 से लेकर 1970 तक कोलकाता से लंदन के बीच में एक बस चला करती थी। यह बस पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान, तुर्की, बलगारिया, युगोस्लाविया, आस्ट्रेलिया, जर्मनी और बेल्जियम होकर लंदन पहुंचेगी।

नरसिंहराव को भारत रत्न? 

पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंहराव को कांग्रेस ने उनके निधन के बाद से भुला दिया। यहाँ तक कि संप्रग सरकार में  उनकी समाधि बनाने के लिए भी दिल्ली में जगह देने में आना-कानी की गई थी। जब तेलंगाना की ग़ैर कांग्रेसी सरकार ने इस साल उनकी जन्मशताब्दी जोर-शोर से मनाने का ऐलान किया गया तब उसे सुध आई। समझा जाता है कि अब सरदार पटेल की तरह केन्द्र की भाजपा सरकार इस मामले में हाथ मारना चाहती है। कुछ सूत्र उन्हें भारत रत्न दिए जाने की कौड़ी लेकर आए हैं। तेलंगाना सरकार ने माहौल बनाना शुरू कर दिया है।

नोबेल पुरस्कार समिति को चीन की घुड़की

नोबेल पुरस्कार समिति से चीन को डर लग रहा है। यह धुकधुकी लगी है कि कहीं चीन हांगकांग के लोकतंत्र समर्थक नेता को पुरस्कार न दे दे। इसलिए चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने नार्वे दौरे में चेतावनी दे डाली। इसके पहले चीन के मानवाधिकार कार्यकर्ता लियू जियाओबो व तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा को नोबेल पुरस्कार दिए जा चुके हैं। 

एक दिन की हाई कमिश्नर बनेंगी

ब्रिटिश हाईकमीशन देश की किसी युवती को ‘एक दिन की हाई कमिश्नर’ बनाएगा। दिल्ली में स्थित ब्रिटिश उच्चायुक्त ने 18 से 23 वर्ष की आयु की उम्मीदवारों से एक मिनट का वीडियो अपलोड करने के लिए कहा है जिसका विषय है- कोविड-19 के दौर मे आप लैंगिक समानता के लिए कौन सी वैश्विक चुनौतियाँ और अवसर देखती हैं। अंतिम तिथि 13 सतंबर है। इसे UKinIndia टैगिंग के साथ फ़ेसबुक, ट्विटर या इंस्टाग्राम पर हैशटेग #DayfortheGirl से साझा करना होगा। 

इस सप्ताह का चर्चित चेहरा

प्रशांत भूषण, न्यायिक एक्टिविस्ट। जिन्हें न्यायालय की अवमानना के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने दोषी ठहराया। सजा का ऐलान सोमवार को किया जाएगा। इस मामले में पक्ष और समर्थन में न केवल राजनीतिक दल विभाजित रहे बल्कि मीडिया भी। मीडिया के एक धड़े ने भी जबर्दस्त अभियान चलाया। न्यायपालिका की कार्यप्रणाली और अवमानना क़ानून पर बहस हुई। शायद इसीके मद्देनज़र न्यायालय ने सजा सुनाने के पहले अवसर दिया। लेकिन प्रशांत भूषण ने माफ़ी माँगने से इंकार कर दिया। प्रशांत भूषण किसी जमाने के मशहूर वक़ील शांति भूषण के बेटे हैं।

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