विश्व आत्महत्या रोधी दिवस-10 सितंबर

नई दिल्ली. इंडिया डेटलाइन. मुरादाबाद के एक अस्पताल में हाल में तीन मरीजों ने आत्महत्या कर ली। उत्तरप्रदेश सरकार ने आत्महत्या के बढ़ते मामलों पर चिंता ज़ाहिर की। लेकिन देश भर में कोरोना काल में ऐसा दिन नहीं जाता जब आत्महत्या की दो-चार खबरें नहीं दिखतीं। ऐसे में इस बार गुरुवार 10 सितंबर को विश्व आत्महत्या निरोधक दिवस अपने इतिहास की सबसे ज्यादा चिंताओं का बोझ ओढ़कर आ रहा है। भारत में हाल में जारी 2019 के आँकड़े ही चौंकाते हैं, कोरोना साल के आँकड़े क्या गजब ढाएँगे, सोचकर सिहरन होती है।

हाल में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की वर्ष 2019 की रिपोर्ट बताती है कि देश गंभीर मानसिक संकट से गुजर रहा है। बेरोज़गारी, शराबखोरी,आर्थिक संकट, घरेलू हिंसा और क़र्ज़दारी जैसे कई कारणों से समाज में आत्महत्या करने की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं। पिछले पचीस सालों में कुछ मामलों में आत्महत्या की घटनाएँ दोगुना तक हो गई हैं। हाल में जारी रिपोर्ट बताती है कि 2019 में आत्महत्या की कुल 1 लाख 39 हजार 123 वारदातें रिकॉर्ड की गईं। इनमें दैनिक मज़दूरी वाले ज्यादा शामिल थे।पिछले छह सालों की तुलना में दिहाड़ी मज़दूरों की ख़ुदकुशी का आँकड़ा पिछले साल दोगुना 23.4 प्रतिशत हो चुका था।इसमें कृषि क्षेत्र के दिहाड़ी का आँकड़ा शामिल नहीं है। 

दिहाड़ी मज़दूरों में सबसे ज्यादा, पहली बार दो अंकों में प्रतिशत

कोरोना में दिहाड़ियों पर अब तक का सबसे बड़ा संकट आया है इसलिए 2020 में इन मामलों में ज्यादा तेज़ी दर्ज हो सकती है। तमिलनाडु में सबसे ज्यादा 5186 दिहाड़ियों ने आत्महत्या की। इसके बाद महाराष्ट्र, तेलंगाना और केरल आते हैं। 2018 में 22.4 प्रतिशत दिहाड़ी मज़दूरों ने व्यावसायिक कारणों से आत्महत्या की। 2014 से 2019 के बीच दैनिक मज़दूरों की ख़ुदकुशी के आँकड़े 15 हजार 735 से बढ़कर 32 हजार 563 यानी दो गुने हो गए। 2019 में बेरोज़गारों की आत्महत्या का प्रतिशत 10.1 था और ब्यूरो के मुताबिक यह 25 साल में पहली बार दो अंकों में पहुँचा।

छात्रों का मामला पेचीदा, 25 साल में पौने दो लाख ख़ुदकुशी

भारत में पिछले पचीस सालों में 1लाख 70 हजार छात्र अपनी जान खुद दे चुके हैं। समाजविज्ञानियों का मानना है कि अवसाद, मानसिक स्वास्थ्य के अलावा नशीली पदार्थ (ड्रग्स) के कारण ऐसा हो रहा है।

एनसीआरबी के आँकड़े कहते है कि हर एक घंटे में एक छात्र आत्महत्या करता है। 2019 में रिकॉर्ड 10 हजार 335 छात्रों की आत्महत्या के मामले दर्ज हुए जो कि पच्चीस सालों में सबसे ज्यादा थे। छात्रों की आत्महत्या के मामले कुल दर्ज आत्महत्या प्रकरणों का 7.5 प्रतिशत थे। 

छात्र आत्महत्या के मामलों में महाराष्ट्र, तमिलनाडु, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, उत्तरप्रदेश आगे हैं जिनके अपराध मिलाकर 44 % हो जाते हैं। इन राज्यों में पिछले साल 10,335 छात्रों ने आत्महत्या की जो पचीस सालों में सर्वाधिक थी। बाल अधिकार विशेषज्ञों की चिंता यह है कि दस से बारह साल की आयुसीमा में चिंता व तनाव को सही ढंग से बाँटने का ज़रिया नहीं होता। कोरोना के हालात को देखते हुए विशेेेेषज्ञों का मानना है कि बड़े स्तर पर प्लान बनना चाहिए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here