नई दिल्ली. इंडिया डेटलाइन. विश्व खाद्य कार्यक्रम को शांति का नोबेल पुरस्कार मिलने पर चीन इस बात से तो खुश हुआ कि यह पुरस्कार उसके किसी उस विद्रोही को नहीं दिया गया जो हांगकांग में लोकतंत्र की माँग कर रहे हैं या चीन में मानवाधिकारों के हनन का मुद्दा उठाते रहे हैं लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन की बजाय विश्व खाद्य कार्यक्रम को पुरस्कार दिए जाने से तिलमिलाया। 

चीन ने शुक्रवार को शांति का नोबेल पुरस्कार ‘विखाका’ को दिए जाने की खबर में इस मुद्दे पर जमकर भड़ास निकाली। यही नहीं, उसने अपने अंसतुष्टों को यह पुरस्कार न दिए जाने का जिक्र भी इस तरह किया जैसे उसे इस खबर से इस मामले में बड़ी राहत मिली। चीन के नज़रिये से देखें तो अंसतुष्टों का जिक्र करने का यहाँ जरूरत नहीं थी। 

शनिवार को जब उसकी साइट खोली गई तो उस पर यह खबर हटा ली गई थी। उस पर लिखा था-’यह लगातार आगे जाने वाली खबर है। हम जल्दी इसे अपडेट करेंगे।’ चीन को इस बात का भय था कि कहीं उसके अंसतुष्टों को नोबेल न दे दिया जाए। इससे चीन को बड़ा नीचा देखना पड़ता। एक खबर में बताया गया था कि चीन के एक वरिष्ठ राजनेता इसी के लिए पुरस्कार समिति को मनाने को पिछले दिनों स्वीडन भी पहुँचे थे। इन अंसतुष्टों के पक्ष में नोबेल समिति को नामांकन प्राप्त हुए थे। 

ग्लोबल टाइम्स चीन सरकार की आधिकारिक भाषा बोलता है। इसलिए उसकी खबर के मायने होते हैं।उसने कल दलील दी थी कि विश्व स्वास्थ्य संगठन इस पुरस्कार का पात्र था। गौरतलब है कि इस संगठन से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसलिए ख़फ़ा हैं क्योंकि उसने चीन के बुहा। से पैदा कोरोना वायरस के मामले को कथित रूप से दुनिया से छुपाया था। 

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