नई दिल्ली. इंडिया डेटलाइन. ‘नीलामी हर जगह होती है और हमारी रोज़मर्रा जिंदगी को प्रभावित करती है। इसलिए इस बार अर्थशास्त्र का ‘नोबेल’ दो ऐसे लोगों को दिया जा रहा जिन्होंने इस प्रक्रिया का अध्ययन करके एक नया फार्मेट तैयार किया। इस फारमेट से दुनिया भर के विक्रेता, ख़रीदार व करदाता लाभान्वित होंगे।’ लगभग इन शब्दों में नोबेल पुरस्कार समिति ने अमेरिका की स्टैनफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के पॉल मिलग्रोम व राबर्ट विल्सन को इस वर्ष का पुरस्कार देने की घोषणा की। 

अमेरिका के अर्थशास्त्रियों को नोबेल पुरस्कार मिलने का यह लगातार छठवाँ साल है। इसमें 2019 के विजेता अभिजीत बैनर्जी भी शामिल है जो भारतीय मूल के अमेरिकी अर्थशास्त्री हैं। अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार की स्थापना 1969 में सर अल्फ्रेड नोबेल की स्मृति में की गई थी। तकनीकी रूप से इस पुरस्कार का नाम नोबेल पुरस्कार नहीं, स्वेरिजेस रिक्सबैंक प्राइज़ ऑफ इकॉनॉमिक साइंस है। लेकिन इसे नोबेल पुरस्कार की ही मान्यता है। यह अब तक 51 लोगों को दिया जा चुका है। 

दोनों अर्थशास्त्रियों ने यह अध्ययन किया कि नीलामी प्रक्रिया कैसे काम करती है। उन्होंने ऐसी वस्तुओं को बेचने के लिए फ़ार्मेट डिज़ाइन किया जिन्हें पारंपरिक तरीके से बेचना कठिन है जैसे रेडियो फ्रीक्वेंसी।

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