कांग्रेस की प्रवक्ता व दक्षिण की हिट हीरोइन भाजपा में शामिल, तमिलनाडु चुनाव पर नजर

नई दिल्ली. इंडिया डेटलाइन.  टीवी के नेशनल चैनल पर बैठकर ‘चौकीदार चोर है’ और ‘भारतीय जुमला पार्टी’ कहने वाली ख़ुशबू सुंदर के आने से भाजपा को क्या मिलेगा? तमिलनाडु की राजनीति में पार्टी का यह नया चेहरा भविष्य के विधानसभा चुनाव में कितना फ़ायदेमंद होगा, राजनीतिक क्षेत्र यह गणित बूझ रहे हैं। विश्लेषक मानते हैं कि भाजपा को तमिलनाडु में पहचान बनाने, टाकिंग पाइंट देने और भीड़ जुटाने वाला एक और चेहरा मिल गया। 50 वर्षीय ख़ुशबू के जानकार उन्हें महत्वाकांक्षी भी मानते हैं जिसमें दूसरी जयललिता बनने की मंशा कसमसा रही है। 

ख़ुशबू सुंदर तमिल फ़िल्मों की हिट हीरोइन रहीं हैं और कोई दो सौ फ़िल्मों में काम कर चुकी हैं। वे हाल तक कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता थीं। सोमवार को वे नई दिल्ली में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गईं। ख़ुशबू के रूप में भाजपा को तमिलनाडु में एक ख़ूबसूरत चेहरा और अच्छा वक़्ता मिल गया। तमिलनाडु की राजनीति में चेहरों का बड़ा महत्व है और वे फ़िल्मों से आए हो तो कहना ही क्या। अन्ना दुराई, रामचंद्रन,करुणानिधि, जयललिता सबके सब फ़िल्मों से आए थे। फ़िल्मों के फ़ैन्स क्लब चुनाव में वोटर क्लब बन जाते हैं। इसलिए भाजपा भी ऐसे चेहरों के पीछे दौड़ रही है तो आश्चर्य नहीं। उसने पिछले दिनों सुपर स्टार रजनीकांत को भी मनाने की कोशिश की। हालाँकि वर्तमान का सच यह भी है कि करुणानिधि के उत्तराधिकारी बेटे स्टालिन और अन्नाद्रमुक के मुख्यमंत्री पलानीस्वामी सिने संसार से नहीं आए। 

ख़ुशबू सुंदर वैसे मुसलमान (नखत खान)  हैं लेकिन फिल्म निदेशक सुंदर से विवाह के बाद ख़ुशबू सुंदर हो गईं। कल तक वे अपने मुसलमान होने पर ट्रोल की जाती थीं और विरोधियों की इसके लिए खबर लेती थीं। टीवी पर बैठकर भाजपा के हिंदुत्व पर प्रहार करती थीं। लेकिन अब उसी की हो गईं। राजनीतिक क्षेत्रों को इसमें कुछ अचरज नहीं लगता क्योंकि विचार और प्रतिबद्धता बेमतलब हो चुकी है। ख़ुशबू कांग्रेस के पहले द्रमुक में थीं। इसलिए वे भाजपा के लिए चुनाव का मोहरा ही हैं। 

तमिलनाडु में भाजपा को पैर ज़माना है। सत्ता बारी-बारी से द्रमुक व अन्ना द्रमुक के पास आती-जाती है। कांग्रेस व भाजपा उनकी जूनियर पार्टनर होती हैं। जयललिता के बाद अन्ना द्रमुक कमजोर है इसका लाभ उठाकर भाजपा आगे बढ़ना चाहती है। उसने 2021 के चुनाव में 235 सीटों वाली विधानसभा में पच्चीस सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। अभी उसका एक भी विधायक नहीं है। कांग्रेस के सात विधायक हैं। 

ख़ुशबू उसके लिए वोट भले ही ज्यादा न बटोर पाएँ, भाजपा को टाकिंग पाइंट जरूर बनाएँगीं। जिसकी भी पार्टी को जरूरत है। विपक्ष की नजर में ख़ुशबू के दलबदल से भाजपा को कुछ नहीं मिलने वाला। सवाल है कि तो कांग्रेस व द्रमुक को क्या मिल रहा था। द्रमुक में तो खुद तत्काल मुख्यमंत्री करुणानिधि ने शामिल किया था।।

ख़ुशबू ने सोनिया गांधी को लिखे पत्र में कहा कि कांग्रेस में ऊपर ऐसे लोग बैठे हैं जिनका मैदानी सचाइयों से कोई वास्ता नहीं है। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अलागिरी को कोई नहीं जानता। ख़ुशबू ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा-’नम्रता भाड़ में गई। मैं सुंदर हूँ, बोल्ड हूँ, साहसी महिला हूँ।’  क्या वे अपने भीतर जयललिता को देख रही हैं? तमिलनाडु में फ़िल्मों से आए राजनेताओं की मंज़िल वैसी ही होती है। फ़िल्मी चेहरों के प्रति अजब दीवानगी है। जयललिता में इस आकर्षण के अलावा एक साहसिक फैसलाकुन व्यक्तित्व भी था।

उन्होंने प्रधानमंत्री के क़सीदे किए-’128 करोड़ लोग एक व्यक्ति में विश्वास करते है जो नरेन्द्र मोदी है।’ ऐसा कहते हुए ख़ुशबू अपने पुराने बयानों व ट्वीट्स को भुला रही हैं। वे संघ व भाजपा की बहुत तीखी आलोचना करती थीं। पिछले सितंबर में जब हिंदी फिल्म अभिनेत्री व कांग्रेस की पूर्व प्रचारक व प्रत्याशी उर्मिला मातोंडकर ने कांग्रेस छोड़ी, उसके बाद से ही ख़ुशबू के भी ट्रैक छोड़ने के संकेत मिलने लगे थे। उन्होंने कांग्रेस से निकाले गए प्रवक्ता संजय झा का समर्थन किया था। प्रवक्ताओं को देखें तो चतुर्वेदी व संजय झा के बाद वे तीसरी बड़ी प्रवक्ता हैं जिन्होंने हाल में कांग्रेस छोड़ी। 

पहली फिल्म जानू

खुंसबू की बतौर नायिका पहली फिल्म जानू की शूटिंग 1984 में नैनीताल में हुई थी। तब वे चौदह साल की थीं। वे ‘द बर्निंग ट्रेन’ :दर्द का रिश्ता’ में बाल कलाकार के रूप में आईं। हिंदी फ़िल्मों में वे ज्यादा नहीं टिकीं और दक्षिण की तरफ रुख़ कर लिया।

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