MP byelection

भोपाल. इंडिया डेटलाइन. मध्यप्रदेश के उपचुनाव में कांग्रेस और भाजपा के बयान युद्ध में तरकस से कुछ ऐसे तीर निकल गए हैं जिनसे खुद के घायल होने की आशंका पैदा हो गई है। कांग्रेस नेता द्वारा शिवराज सिंह को ‘भूखे-नंगे घर का’ बताने पर भाजपा ने बहुत आक्रामक तेवर अपना लिए हैं । भाजपा नेताओं ने सोश्यल मीडिया पर ‘मैं भी शिवराज’ अभियान शुरू कर दिया है। कार्यकर्ताओं और भाजपा समर्थकों में डीपी पर यही नाम लिखने की होड़ लगी है। कांग्रेस को इस बयान के बूमरैंग (पलटकर वार करने वाला हथियार) होने का डर सता रहा है।

कांग्रेस के एक नेता दिनेश गुर्जर ने कमलनाथ को उद्योगपति व शिवराज सिंह को भूखे-नंगे घर का बताया था। इस पर मप्र भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया ही नहीं दी, इसे जोर-शोर से प्रचारित करना शुरू कर दिया। भाजपा ने कहा कि कांग्रेस ने ग़रीब का अपमान किया है। यही नहीं, भाजपा ने सोश्यल मीडिया पर #MaiBhiShivraj अभियान शुरू कर दिया। नेताओं की डीपी में चौबीस घंटे के लिए यही लिखने को कहा गया। ट्वीटर पर लिखा जाने लगा-’यदि ग़रीब होना गुनाह है तो मैं भी शिवराज।’

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने एक के बाद एक ट्वीट किए जिनमें कहा कि ‘जब किसी ग़रीब किसान का बेटा मुख्यमंत्री बनता है तो कांग्रेस के लोग उसे भूखा-नेता कहते हैं।’ ‘कमलनाथजी, आप उद्योगपति हैं और बड़े आदमी है। इसलिए सरकारी योजनाओं से ग़रीबों को वंचित कर दिया है। हम भूखे-नंगे हैं हमने 77 लाख किसानों का नाम सम्मान निधि योजना से जोड़ा है।’ 

कांग्रेस में इस पर चुप्पी और बेचैनी है। कमलनाथ व अन्य बड़े नेता इस पर बात करने से परहेज़ करते रहे। मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार नरेन्द्र सलूजा ने जरूर ग़रीब को लेकर कई ट्वीट किए और सवाल पूछे। लिखा कि जो आज खुद को ग़रीब बता रहे हैं, वे बताएँ कि बीस साल में संपत्ति में इतना बड़ा अंतर कैसे आया।? 

भाजपा ने एक जनसभा में शिवराज सिंह के घुटनों के बल बैठने को भी इससे जोड़ लिया और कांग्रेस पर हमला किया। भाजपा समर्थकों ने कमलनाथ की सोनिया गांधी के आगे झुकने की एक तस्वीर जारी कर पूछना शुरू किया कि घुटने किसके सामने टेकने हैं, ये व्यक्ति को ही तय करना होता है।कमलनाथ घुटने कहाँ टेक रहे हैं। 

पाठकों को याद होगा कि लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी द्वारा नरेन्द्र मोदी को ‘चौकीदार चोर है’ कहे जाने पर भाजपा ने ‘मैं भी चौकीदार’ अभियान इसी तर्ज़ पर शुरू किया था जो कांग्रेस पर भारी पड़ा था।

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