भोपाल. इंडिया डेटलाइन. ‘उफ़ ये मौलाना ’ तीन शब्द किसी की झल्लाई प्रतिक्रिया लगेगी लेकिन ये पत्रकार विजय मनोहर तिवारी के सुविचारित चिंतन का प्रतिफल हैं। यह उनकी आने वाली पुस्तक का शीर्षक है। दरअसल चार सौ बीस पेज की किताब कोरोना काल की एक डायरी है। 

विजय मनोहर भोपाल के सुपरिचित पत्रकार है। फिलहाल मध्यप्रदेश के सूचना आयुक्त के पद पर हैं। वे पिछले पच्चीस साल प्रिंट और टीवी में काम करते रहे हैं। इस दौरान उन्होने देश-दुनिया घूमी जिनके अनुभव उनकी पुस्तक ‘भारत की खोज में मेरे पाँच साल’ में संचित हैं। इसके अलावा  ‘एक साध्वी की सत्ता कथा’ एक पत्रकार द्वारा अनुभूत राजनीति के विद्रूप का ख़ुलासा है। उनका लेखकीय सफ़र प्रमुख रूप से एक संवाददाता के रूप में डूबते हुए हरसूद शहर की रिपोर्टिंग से शुरू हुआ था जिसके अनुभवों पर ‘हरसूद 30 जून’ लिखी। उनकी सात किताबें आ चुकी हैं। 

दिल्ली में ‘गरुड़ प्रकाशन’ की ओर से पुस्तक के प्रकाशन और एडवांस बुकिंग की औपचारिक घोषणा शनिवार को की गई।

किताब के बारे में खुद विजय मनोहर तिवारी लिखते हैं- हम सब जानते हैं कि दुनिया भर में कोरोना एक महामारी की शक्ल में ही आया, लेकिन कोरोना के आगमन के साथ ही भारत में तबलीग की धुन अलग से सुनी गई। कोरोना एक वायरस था, जिससे निपटने के लिए अस्पतालों और डॉक्टरों को ही जुटना था। वे दुनिया भर में जूझ भी रहे थे, लेकिन भारत में डॉक्टरों से ज्यादा पुलिस, अदालत और जेलों में हलचल मची। ऐसे दृश्य दुनिया के किसी भी देश में दिखाई नहीं दिए, जब गली-मोहल्लों में गए मेडिकल जाँच दलों को बेइज्जत किया गया और उन पर जानलेवा हमले हुए। कुछ लोग कोरोना को मजाक समझ रहे थे। उन्हें लग रहा था कि यह उनके खिलाफ सरकार की कोई साजिश है, जो एक साथ इकट्‌ठे होकर इबादत से रोका जा रहा है या पूजास्थल बंद किए जा रहे हैं। कोरोना के विकट समय भारत का सामुदायिक चरित्र भी उजागर होता हुआ सबने देखा। शाहीनबाग का मजमा सिमटते ही जैसे उन्हीं आवाजों का शोर कोरोना पर सवार हो गया था।

जब एक महामारी के कारण देश और दुनिया इतिहास की सबसे संकटपूर्ण स्थिति में फँसी हो और समाज का कोई तबका अलग और उलट ढंग से पेश आए तो यह किसी भी सभ्य समाज और मजबूत सरकार के लिए नजरअंदाज करने वाली घटना नहीं है। भारतीय संदर्भ में यह किताब कोरोना काल का एक विचारोत्तेजक दस्तावेज है। विचारों में सहमति जरूरी नहीं है। राय अलग हो सकती है। किंतु वैचारिक भिन्नता स्थापित सत्य को बदल नहीं सकती। 

गरुड़ प्रकाशन की लिंक-

https://garudabooks.com/uff-ye-maulana-india-fights-corona?fbclid=IwAR1k33pCp-BvzIVRBsMtY1ib0agp8TKg-xmfRERjaKlY2TEF55SQeKSnePg

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