उनका चेहरा दुनिया भर की चमकीली पत्रिकाओं के मुखपृष्ठ पर छपा। उनके नेतृत्व करने की शैली हॉवर्ड के शोधार्थियों के अध्ययन का विषय बनी। कोरोना के प्रति उनके वैज्ञानिक और समन्वयवादी दृष्टिकोण ने दुनिया के दूसरे देशों में भी प्रशंसकों का ध्यान खींचा और उन्होंने कहा-हमें आपकी जरूरत है।

दुनिया भर के वाम और वाम-मध्य झुकाव वाले लोग एक ऐसे नेता के प्रशंसक हो गए जिसके लिए छोटी सी आबादी के देश को चलाना महापौरों की तरह का काम है। अब उनके देश के मतदाता आम चुनाव में उनके समर्थन में खड़े हो गए हैं। शनिवार को चालीस वर्षीय श्रीमती जेसिंडा आर्दर्न प्रधानमंत्री के रूप में अपनी दूसरी पारी शुरू करने की तरफ बढ़ गईं। अब तक गिने गए वोटों में उनकी लेबर पार्टी को बहुमत के वोट मिल गए। 120 में से 64 सीटें उन्हें मिल चुकी थीं और 49% समर्थन। 90 के दशक में मतदान प्रणाली में सुधार के बाद किसी पार्टी को मिला यह सबसे मजबूत बहुमत है। 

कोरोना वायरस के प्रति जल्दी और कठोर कदम उठाने के कारण उन्हें लोकप्रियता हासिल हुई। उन्होंने शनिवार की रात राजधानी ऑकलैंड में लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि हम वैसे ही सरकार चलाएंगे जैसे हमने चुनाव अभियान चलाया-सकारात्मक ढंग से। हम कोरोना से जंग जीतकर फिर अपनी स्थिति को प्राप्त करेंगे। यह हमारे लिए एक अवसर है। 3 साल पहले श्रीमती आर्दर्न लेबर पार्टी में सबसे आखरी पसंद थीं। उन्हें अपने पहले कार्यकाल में प्रगतिशील वादों को पूरा करने के लिए भी संघर्ष करना पड़ा-जैसे घरों को आम आदमी की पहुंच में लाना, बाल निर्धनता खत्म करना और पर्यावरण से बदलाव को रोकना। चर्च पर हमले, ज्वालामुखी विस्फोट और महामारी से निपटने के बाद वे नेतृत्व की वैश्विक प्रतिमान बन गई हैं।  प्रगतिशील राजनीति के लिए वोग पत्रिका ने उन्हें ‘ट्रंप विरोधी’ कहा तो फाइनेंशियल टाइम्स ने ‘संत जेसिंडा’ लिखा। न्यूयार्क टाइम्स का पिछले वर्ष शीर्षक था-अमेरिका को जेसिंडा जैसा नेता चाहिए। लोकनीति संस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ ऑकलैंड की निदेशक जेनिफर कर्टिन कहती हैं कि वह अब अपने वादों को पूरा करने की ज्यादा ताकत रखती हैं। जेसिंडा ने अभी अपने पत्ते ज्यादा नहीं खोले हैं। प्राथमिक तौर पर वे महामारी से निपटने को मिले समर्थन के आधार पर जीती हैं। न्यूजीलैंड दूसरी बार सामुदायिक संक्रमण से बाहर निकला है। 50 लाख की जनसंख्या वाले देश में कोरोना वायरस से 25 मौतें हो चुकी हैं। अब यह सामान्य दिख रहा है। न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच में हाल ही में रग्बी मैच हुआ जिसे 30 हजार लोगों ने देखा। उनके विरोधी जुडिथ कॉलिंस कोरोना वायरस के दोबारा फैलने का मुद्दा उठाती हैं। उन्होंने चुनाव प्रचार के आखिरी दौर में जेसिंडा को झूठा भी करार दिया। उन्होंने कहा कि यह बड़ा झूठ था कि हर व्यक्ति का कोरोना परीक्षण किया गया है। उन्होंने देश से बहुत कुछ छुपाया। न्यूजीलैंड में अभी तक साझा सरकारें चलती रही हैं लेकिन उनकी साझेदार न्यूजीलैंड फर्स्ट पार्टी को एक भी सीट मिलती नहीं दिख रही है। हालाँकि ग्रीन पार्टी और माओरी पार्टी उनकी सहयोगी हो सकती हैं जिन्हें क्रमश: दस व एक सीट मिल रही है। जेसिंडा के सामने दूसरे कार्यकाल में कई चुनौतियां हैं, खासतौर पर कोरोना से हुए आर्थिक नुकसान की। मेसी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर का कर्टिन कहते हैं कि जेसिंडा रेडिकल की बजाय रिफॉरमिस्ट (सुधारवादी) हैं। नया रास्ता खोजेंगीं। लेखक मोरगन गॉडफ्रे कहते हैं कि वे नहीं जानते कि अपनी लोकप्रियता का लेबर पार्टी किस तरह इस्तेमाल करेगी। संपत्ति कर का एक ऐसा मुद्दा है जिससे तुरंत निपटना होगा।

(न्यूयार्क टाइम्स से साभार)

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