नागपुर.  इंडिया डेटलाइन.  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के  प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने कहा है कि चीन से संघर्ष में  भारत ने स्वाभिमान, दृढ़ निश्चय और वीरता का प्रदर्शन किया। उसके प्रति लगातार सजग और दृढ़ रहने की जरूरत है। इसके अलावा सरकार को भारत के पड़ोसी नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश और म्यांमार से संबंधों में सुधार की प्रक्रिया को तेज करना चाहिए। उन्होंने स्वयंसेवकों से कोरोना काल में संकट में आए लोगों की सेवा का कार्य तेज करने का आह्वान भी किया।

डॉक्टर भागवत संघ के वार्षिक दशहरा उत्सव समारोह को संबोधित कर रहे थे। रविवार को संघ प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर स्थित मुख्यालय में शस्त्र पूजा की। उन्होंने कहा कि राम मंदिर पर 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट का असंदिग्ध निर्णय आया। एकमत से निर्णय था, सारे देश ने समाज ने उसे स्वीकार किया। हर्षोल्लास का विषय होने के बाद भी संयम से उसे मनाया। कोरोना के चलते इस बार केवल 50 लोग मौजूद थे। 

अपने लंबे भाषण में हिंदू, हिंदुत्व, कोरोना से उपजी समस्याओं, स्वदेशी, राष्ट्रीय समस्याओं पर राजनीतिक दलों के रवैये जैसे मुद्दों की चर्चा की।  सरसंघचालक ने कहा कि कोरोना के कारण शैक्षिक संस्थानों में वेतन देने की परेशानी खड़ी हो गई है, वहीं अभिभावक शुल्क नहीं चुका पा रहे हैं। ऐसे में हमें इनकी सहायता करनी होगी। इसी के साथ उन लोगों की मदद भी करनी पड़ेगी जिनका रोजगार छिन गया है और जिन्हें विस्थापन का शिकार होना पड़ा है। श्री भागवत ने परिवारों में उत्पन्न तनाव के संदर्भ में परामर्श की आवश्यकता भी बताई।

संघ प्रमुख ने कहा कि हमने अर्थ, कृषि, श्रम, उद्योग और शिक्षा नीति में स्व अर्थात स्वावलंबन और स्वदेशी विचार लाने की दिशा में आशाजनक कदम उठाए हैं और इनका स्वागत भी हुआ है। परंतु इनके क्रियान्वयन पर भी बारीकी से ध्यान देना होगा। 

उन्होंने कहा कि देश की एकात्मता व सुरक्षा के हित में ‘हिन्दू’ शब्द को आग्रहपूर्वक अपनाकर, उसके स्थानीय तथा वैश्विक, सभी अर्थों को कल्पना में समेटकर संघ चलता है। संघ जब ‘हिन्दुस्थान हिन्दू राष्ट्र है’ इस बात का उच्चारण करता है तो उसके पीछे कोई राजनीतिक अथवा सत्ता केंद्रित संकल्पना नहीं होती।

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