MP By-election मलहरा विधानसभा सीट

– नरेन्द्र दुबे की रिपोर्ट

मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड की मलहरा विधानसभा सीट पर उपचुनाव कश्मकश और रोचक दौर में पहुंच गया है । मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए इस सीट से जीत जरूरी है तो पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती की प्रतिष्ठा यहाँ दांव पर है क्योंकि उमा भारती ही अपने निजी पारिवारिक संबंधों के चलते गत चुनाव में मलहरा से निर्वाचित कांग्रेस विधायक प्रद्युम्न सिंह लोधी को इस्तीफा दिलाकर उपचुनाव करा रही हैं। प्रद्युम्न सिंह अब भाजपा टिकट पर चुनाव मैदान में हैं।

केन्द्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल के दमोह संसदीय क्षेत्र में मलहरा विधानसभा क्षेत्र भी है। अतः श्री पटेल भी डॉक्टरों की आराम की सलाह को नजरअंदाज करते हुए 4 दिन से मलहरा के प्रमुख गांव-कस्बों में घूमकर भाजपा कार्यकर्ताओं-नेताओं से मिलकर रणनीति बना रहे हैं और जनसंपर्क में जुटे हैं।

यहाँ मुकाबला त्रिकोणीय बन गया है। भाजपा के प्रत्याशी प्रद्युम्न सिंह लोधी का मुकाबला कांग्रेस की उम्मीदवार साध्वी रामसिया भारती से ही होने जा रहा था, जो खुद भी लोधी विरादरी की हैं। पर बसपा ने दिग्गज और बुजुर्ग नेता अखंड प्रताप सिंह  यादव को मैदान में लाकर मुकाबले को त्रिकोणीय शक्ल दे दी है । इस क्षेत्र में यादव और दलित मतदाताओं की संख्या निर्णायक है। अखंड प्रताप सिंह दुधारी तलवार की तरह पेश आ रहे हैं। वे कांग्रेस के दलित और भाजपा के यादव वोट में सेंध लगा रहे हैं। अखंड प्रताप 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर विधायक बने थे। वे दिग्विजय सिंह और शिवराज सिंह की सरकारों में मंत्री रह चुके हैं। अभी कांग्रेस छोड़ बहुजन समाज पार्टी में आए हैं।

दल बदल का दाग झेल रहे प्रद्युम्न सिंह के चचेरे भाई दमोह विधायक राहुल सिंह लोधी भी अचानक कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हो गए। मतदाताओं में इसका विपरीत प्रभाव पड़ता नजर आ रहा है। उधर चुनाव से चार दिन पहले प्रद्युम्न सिंह कोरोना संक्रमित होकर भोपाल के चिरायु अस्पताल में भर्ती हो गए हैं । कांग्रेस प्रत्याशी रामसिया भारती, उमा भारती की ही वेशभूषा और अंदाज में राम कथा के प्रसंगों व उदाहरणों के माध्यम से अपनी बात रख रही हैं। रामसिया भारती के चुनाव संचालन की कमान छतरपुर के विधायक आलोक चतुर्वेदी पज्जन और पूर्व मंत्री हर्ष यादव सम्हाले हैं।  पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, अरुण यादव और अजय सिंह राहुल मलहरा में सभा ले चुके हैं। ऊंट किस करवट बैठता है, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। 

भाजपा के लिए अनुकूलता न होने के बाद भी शिवराज सिंह चौहान की मार्मिक अपील, उमा भारती और प्रहलाद पटेल की मेहनत ही एक भरोसा है। गौरतलब है कि मलहरा उमा भारती की भरोसे की सीट है। वे खुद मलहरा से विधायक निर्वाचित होने के बाद मुख्यमंत्री बनी थीं। उसके पहले उनके अग्रज स्वामी लोधी यहाँ से विधायक थे। उमा भारती की कट्टर समर्थक रेखा यादव भी 2008 और 2013 में यहां से विधायक बनीं। लोधी जाति यहाँ प्रभावी स्थिति में है और उमा भारती का प्रभाव है। देखना है अब कौन बाजी जीतता है और कौन अपना रसूख कायम रखता है।

(दुबे दमोह के वरिष्ठ पत्रकार हैं। जनसत्ता के संवाददाता रहे हैं।)

1 COMMENT

  1. त्रिकोणीय मुकाबले में ऊंट किस करवट बैठेगा यह तो समय ही बताएगा एक रोचक बेहद महत्वपूर्ण जानकारी साझा करने केलिए श्री नरेन्द्र दुबे जी को साधुवाद

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