नई दिल्ली. इंडिया डेटलाइन. अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय चुनाव जीत रहे हैं। कमला हैरिस के अलावा ‘समोसा कॉकस’ की जीत की चर्चा है। यह संयुक्त राज्य में भारतीय मूल के लोगों के दबदबे को बताता है। व्यावसायिक व तकनीकी क्षेत्र में भारतीयों के उत्कृष्ट योगदान के बाद राजनीति में बढ़ता प्रभाव भारत के लिए कितना फ़ायदेमंद है? इस मामले में जानकार मानते हैं कि इससे भारतीयों के खुश होने की जरूरत नहीं है क्योंकि इनमें से कई की प्राथमिकताओं में भारत कहीं नहीं है। 

समोसा कॉकस

भारत मूल का सबसे रोशन चेहरा कमला हैरिस हैं। 56 वर्ष की यह पूर्व नौकरशाह राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी जो बाइडेन की सहयोगी के रूप में उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवार हैं। वे दक्षिण भारत से अमेरिका गईं। उनकी माँ भारतीय थीं तो पिता जमैका से आए थे। कमला भारत आती रहती हैं और चुनाव में उन्होंने दक्षिण  भारत के ख़ानपान व अन्य बातों का जिक्र किया लेकिन यह भारतीय मतदाता को लुभाने के लिए था। वास्तव में वे मानव अधिकारों की ऐसी समर्थक हैं जो काश्मीर के मामले में वर्तमान भारतीय नीति के खिलाफ जाता है। यद्यपि उनके दल रिपब्लिकन की आव्रजन को लेकर नीति का लाभ भारत को मिलेगा। 

कमला और जीत की ओर जा रहे अन्य भारतवंशियों से भारतीय और कुल मिलाकर अश्वेतों की आवाज़ गोरों के देश में मजबूत होती है। इससे लगभग तीन दशक पहले तक मौजूद नस्लभेद पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। ताजा परिणामों में कई भारतीय प्रतिनिधि सभा और राज्यों की विधानसभाओं में जीत चुके हैं। कई राज्यों के सदनों में पहली बार भारतीयों का प्रवेश हो रहा है। अमेरिकी-भारतीय समुदाय में ‘समोसा कॉकस’ की चर्चा है। इस कॉकस में 4 भारतीयों ने डेमोक्रेटिक पार्टी के टिकट पर शानदार प्रदर्शन किया। ये हैं-डॉक्टर एमी बेरा, प्रमिला जयपाल, रो खन्ना और राजा कृष्णमूर्ति जो  प्रतिनिधि सभा के लिए चुने गए। ये सभी अमेरिकी राजनीति के वरिष्ठ भारतवंशी सदस्य हैं। प्रमिला जयपाल पिछले चुनाव में भी उन तीन विशिष्ट महिलाओं में शामिल थीं जिन्होंने भारतीय मतदाताओं को रिझाया था।

भारतीय-अमेरिकी समुदाय पहली बार राष्ट्रपति के चुनाव में इतनी प्रभावी भूमिका निभा रहा है। डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों दलों के अभियान की शुरुआत इस समुदाय के 18 लाख सदस्यों को रिझाने से हुई। राष्ट्रपति चुनाव के लिए अहम माने जाने वाले राज्यों फ्लोरिडा, जॉर्जिया, मिशीगन, नॉर्थ कैरोलिना, पेंसिलवेनिया और टेक्सास मैं यह समुदाय बहुत प्रभावी है। कृष्णमूर्ति ने इन भारतीयों को ‘समोसा कॉकस’ की संज्ञा दी। वैसे समोसा कॉकस में 5 लोग हैं जिनमें 4 प्रतिनिधि सभा का चुनाव जीते। पांचवी उपराष्ट्रपति पद के लिए नामित कमला हैरिस हैं।  

राजा कृष्णमूर्ति (47) ने आसानी से लिबर्टेरियन पार्टी के प्रेस्टन नेलसन (30) को हरा दिया। उन्हें कुल गिने गए मतों का 71% मिला। वहीं 44 वर्षीय रो खन्ना ने 48 वर्षीय इंडियन अमेरिकन रितेश टंडन को हराया। डॉक्टर एमी बेरा 55 समोसा कॉकस की वरिष्ठ सदस्य कैलिफोर्निया से जीतीं। यह उनकी पांचवीं जीत है। इसी बीच 42 वर्षीय प्रेस्टन कुलकर्णी अपने प्रतिद्वंद्वी ट्रॉय नेल्स (52) से हार गए। रिपब्लिकन मंगा अनंता मुला भी डेमोक्रेटिक गैरी क़ोनौली से हार गए। रिपब्लिकन निशा शर्मा को भी शिकस्त मिली। 

भारतीय मूल के डेमोक्रेट अरबपति श्री थानेदार मिशीगन से 93% वोटों के साथ प्रतिनिधि सभा के लिए चुन लिए गए। 65 वर्षीय थानेदार वैज्ञानिक और उद्योगपति हैं। 

एक दर्जन से ज्यादा भारतीय-अमेरिकी  जिनमें 5 महिलाएं भी शामिल हैं,  राज्य स्तर के चुनावों में  विजयी हुए हैं। राज्य की असेंबली के लिए चुनी गईं 5 महिलाओं में जेनिफर राजकुमार न्यूयॉर्क, नीमा कुलकर्णी कैंटुकी केशाराम  वरमांट स्टेट सीनेट,  वंदना स्लेटर वॉशिंगटन स्टेट हाउस और पदमा कुप्पा मिशीगन स्टेट हाउस में जाएंगी। इसके अलावा नीरज अनतानी ओहियो स्टेट सीनेट के लिए चुने गए पहले भारतीय हैं जबकि जय चौधरी नॉर्थ कैरोलिना के लिए फिर से निर्वाचित हुए। अमीश शाह एरिजोना स्टेट हाउस, निखिल सवल पेंसिलवेनिया, रंजीव पुरी मिशीगन और जेरेमी कूनी न्यूयॉर्क स्टेट सीनेट के लिए चुने गए। आशा कालरा कैलिफोर्निया स्टेट असेंबली में तीसरी बार चुनी गईं और रवीश सांडे ने टेक्सास में डिस्ट्रिक्ट कोर्ट जज का चुनाव जीता। केशाराम वरमांट स्टेट असेंबली के लिए चुनी गईं पहली अश्वेत महिला हैं वहीं निखिल सवल पेंसिलवेनिया जनरल असेंबली के लिए चुने गए पहले भारतीय हैं। जेनिफर राजकुमार पहली दक्षिण एशियाई महिला हैं जो न्यूयॉर्क स्टेट ऑफिस के लिए निर्वाचित हुईं वहीं नीरज अंतानी ओहियो सीनेट के लिए चुने गए पहले भारतीय हैं। इंपैक्ट फंड जुटाने वाले नील मखीजा का कहना है कि इस साल के चुनाव भारतीयों की बड़ी कूद दिखाते हैं। ( शिकागो से कुमुद पटेल व एजेंसी इनपुट)

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