-फिलाडेल्फिया से भूपेन्द्र सिंह भूपी की ‘इंंडिया डेटलाइन’ के लिए विशेष रिपोर्ट

अमेरिका में एक तरह से फिर बराक ओबामा का राज आ गया है। नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जोसेफ (जो) रॉबिनेट बाइडेन जूनियर की विजय यात्रा के शिल्पी वही हैं। पूरा अमेरिका 78 वर्षीय बाइडेन की ऐतिहासिक जीत के जश्न में डूबा है और ट्रंप दो दिन में ही खलनायक की तरह देखे जाने लगे हैं। उन्होंने बाइडेन को बधाई देने से इंकार कर राजनीतिक शिष्टता का पालन करने से भी परहेज़ किया है। उपराष्ट्रपति के पद पर कमला हैरिस की विजय से भारतीय-अमेरिकी समाज में अजब उल्लास है।

बाइडेन ने अमेरिका के चुनावी इतिहास में कई उलटफेर किए। उन्होंने निवृत्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप  के रिपब्लिकन गढ़ों में सेंध लगाई। इतने वोट बटोरे जितने अमेरिका में अब तक किसी राष्ट्रपति को नहीं मिले। पहली बार अपनी सहयोगी के तौर पर अश्वेत और महिला को चुना और शानदार विजयश्री तक पहुँचाया। जीत के बाद पहले भाषण में भी उन्होंने अपनी चिरपरिचित सौम्यता का परिचय दिया। ट्रंप का आचरण इस नए आईने में अटपटा लगने लगा। वे अपनी हार मानने की बजाय सुप्रीम कोर्ट गए हैं।

बाइडेन का अमेरिकी समाज में सम्मान है लेकिन वे कभी भी आक्रामक व दबदबे वाली शैली के राजनेता नहीं रहे। उन्हें तो अनौपचारिक बातचीत में ‘स्लीपी जोइ’ कहा जाता है। शायद यही कुछ वजहें हैं जिनसे वे दो बार पहले भी व्हाइट हाउस पहुँचने में नाकामयाब रहे थे। समझा जाता है कि यदि पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा उनके पीछे नहीं होते तो शायद बाइडेन दुनिया के शीर्ष पद तक नहीं पहुँच पाते। बराक ने बाइडेन के रणनीतिक अभियान का मार्गदर्शन किया और चुनाव प्रचार किया। दरअसल यह चुनाव बाइडेन को चुनने का कम था, बल्कि ट्रंप या नो-ट्रंप के लिए मतदान हुआ। 

माना जा रहा है कि बाइडेन प्रशासन बराक को किसी सम्मानजनक पद से नवाजेगा। राष्ट्रपति पद से बड़ी क्या हैसियत हो सकती है, इसे लेकर लोग यहाँ तक सोचते हैं कि ओबामा को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बनाने की पेशकश की जा सकती है। वे देश के नामी वक़ील हैं और लॉ फ़र्म चलाते हैं। संविधान की धाराएँ उनकी अंगुलियों पर हैं। हाल में ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट में एक महिला न्यायाधीश की नियुक्ति की है। यह राष्ट्रपति के अधिकार में होता है। 

बाइडेन की जीत पर रविवार को देश भर में उल्लास भरे आयोजन किए गए। यह खबर लिखते समय फिलाडेल्फिया की सड़कों पर जाम की स्थिति थी। बाइडेन यह जश्न अपने गृहप्रांत डेलवेअर के वेलिमिंगटन शहर में मना रहे हैं। उनका गाँव इसी प्रांत के सुदूर इलाके में है। कमला हैरिस को भारतीय समुदाय हाथों पर उठाए हैं। कमला ने चुने जाने के बाद फिर अपने घर, माँ और परिवार को याद किया। 2009 में दिवंगत माँ श्यामला गोपालन की याद उन्होंने उम्मीदवार बनाए जाने के वक्त भी की थी। उन्होंने रविवार को अपने संबोधन में कहा कि ‘माँ ने ही उन्हें अमेरिका की धरती की सेवा के लायक बनाया।’ यही उनका भारत से कनेक्ट है। उनकी माँ उच्च अध्ययन के बाद शोध करने के लिए अमेरिका आई थीं। कमला कैलीफोर्निया में एटार्नी जनरल थीं। 

हैरिस को चुनकर बाइडेन ने न केवल अश्वेतों को लुभाया बल्कि वोटिंग पैटर्न से पता चलता है कि महिलाओं के वोट भी डेमोक्रेट्स को बड़ी तादाद में मिले। बाइडेन और हैरिस की जोड़ी भारत के लिए कितने मुफ़ीद है, यह सवाल अक्सर भारतीय मित्र पूछ रहे हैं। इस संबंध में हमारा मानना है कि बाइडेन राजनीतिक रूप से परिपक्व हैं। इसके विपरीत ट्रंप व्यापार करते हुए सीधे राष्ट्रपति बन गए थे। इसलिए ट्रंप कह सकते थे कि ‘चीन की बारह बजा देंगें’ या ‘चीनी वायरस ने अमेरिका को तबाह किया।’ बाइडेन ने चुने जाते ही कहा कि वैदेशिक संबंधों को अंतरराष्ट्रीय क़ायदों से निपटाया जाएगा। 

इसी तरह, भले ही मानव अधिकारों के मामले में काश्मीर पर भारतीय नीति से अलग स्टैंड लेने के कारण हैरिस को भारत के एक वर्ग में संदेह की दृष्टि से देखा जा रहा हो, अमेरिकी-भारतीय समुदाय उन्हें भारत के अनुकूल मानता है। लोगों का स्पष्ट मत है कि बाइडेन-हैरिस का दृष्टिकोण भारतीय मामलों में 360 डिग्री के कोण से इसलिए नहीं बदल सकता क्योंकि इन लोगों के पीछे बराक ओबामा हैं जो भारतीय पक्ष को बख़ूबी समझते हैं। 

अब यह विश्लेषण शुरू हो गया है कि डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका को किस दिशा में ले गए। कुछ लोग तो अब ट्रंप पर मुक़दमे चलाए जाने की बात कहते हैं। ट्रंप ने कई विवादास्पद व नियमों से हटकर काम किए। उनकी रिपब्लिकन पार्टी पूँजीपतियों की समर्थक मानी जाती है जबकि डेमोक्रेट्स इस संरक्षणवाद के पक्ष में नहीं हैं। ट्रंप ने बड़े उद्योगपतियों को टैक्स में तगड़ी छूट दी थी। जिसे खत्म करने का डेमोक्रेटस ने वादा किया था। ट्रंप को कोरोना, आर्थिक कुप्रबंध, वैदेशिक मामलों की विफलता व कई नीतिगत फैसले ले डूबे। वे विश्व युद्ध के बाद चुनाव हारने वाले तीसरे राष्ट्रपति हैं। 

बाइडेन को अंतत: जीत की ओर पेनसिलवेनिया के बीस वोटों ने पहुँचाया जिससे उनका आँकड़ा 270 हो गया। 

(भूपी मध्यप्रदेश व पंजाब में पत्रकारिता करने के बाद इन दिनों पेंसिलवेनिया में रहते हैं। ) 

1 COMMENT

  1. बाइडेन की विजय पर हार्दिक बधाई देते हुए लेखक को भी बधाई बाइडेन की विजय भारत की राजनीति में,अग्रणी भूमिका निभायेंगे,बराक ओबामा पहले ही भारत के पक्ष में है। उपराष्ट्रपति पर भारतीय मूल की कमला जी की विजय भी,भारत के लिए गर्व का विषय है। निश्चित ही इस आलेख ने शीतल फुहार की है।
    धन्यवाद

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