भोपाल. इंडिया डेटलाइन. मध्यप्रदेश के चर्चित ‘राजनीतिक संत’ पायलट बाबा को कांग्रेस की राजनीति करना महँगा पड़ गया। उनके इंदौर के पास जम्बूड़ी हप्सी में स्थित आश्रम पर शिवराज सिंह सरकार ने बुलडोज़र चलवा दिया। बाबा कांग्रेस के स्टार प्रचारक थे और हाल के उपचुनाव में सरकार के खिलाफ ‘लोकतंत्र बचाओ यात्रा’ निकाल चुके थे। वे शिवराज सिंह के कटु आलोचक होने के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जीतने पर समाधि लेने की घोषणा भी कर चुके थे। दिग्विजय सिंह का चुनाव प्रचार करने वाले बाबा के बचाव में अब सिंह उतर आए हैं और सोमवार को इंदौर जेल में बाबा से मुलाकात करेंगे।

दरअसल बाबा काँच के घर में बैठकर दूसरों पर पत्थर उछाल रहे थे। नामदेव दास त्यागी से कंप्यूटर बाबा कहलाने वाला यह संत दिगंबर अखाड़ा का सदस्य है। मालाओं से लदे-फदे और माथे पर लंबे तिलक धारण करने वाले बाबा ने 46 एकड़ सरकारी जमीन पर क़ब्ज़ा कर आश्रम बनाया था। सरकार ने न केवल उनके अतिक्रमण को ध्वस्त किया बल्कि बाबा को भी हिरासत में ले लिया। यही नहीं, उनके आश्रम से 315 बोर की राइफ़ल व एक एयरगन बरामद करने का दावा भी किया गया है। इस मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

बाबा को कमलनाथ ने अपने मुख्यमंत्रित्व में नर्मदा न्यास मंडल बनाकर उसका अध्यक्ष बनाया और राज्य मंत्री का दर्जा दिया था। इस दौरान उनका जलवा था। प्रशासन पर धौंस दिखाने में बाबा ने कसर नहीं छोड़ी। वे रेत खदानों का निरीक्षण करने के लिए पहुंच जाते थे। एक बार तो उन्होंने नर्मदा नदी के सर्वेक्षण के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ से हेलीकॉप्टर व ड्रोन कैमरे की माँग कर दी थी। साथ ही मंत्रालय में कक्ष आवंटित करने की भी माँग की। तत्कालीन मंत्री पीसी शर्मा ने इसकी नोटशीट लिखी।

वर्ष 2014 में कंप्यूटर बाबा ने आप पार्टी से चुनाव टिकट की माँग की थी। इसके बाद वे कांग्रेस से जुड़े और भोपाल से लोकसभा चुनाव लड़ रहे दिग्विजय सिंह का प्रचार किया। बाबा ने उनकी जीत की भविष्यवाणी भी की जो गलत साबित हुई। 28 सीटों के उपचुनाव से पहले बाबा ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को लोकतंत्र का हत्यारा बताकर ‘लोकतंत्र बचाओ यात्रा’ शुरू की और उन 25 विधानसभा क्षेत्रों में चौपाल लगाने की घोषणा की थी जिनके विधायक कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे।

कांग्रेस उनके पक्ष में खड़ी हो गई है। दिग्विजय सिंह सोमवार को उनसे मुलाकात करने के लिए इंदौर जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बदले की भावना से बिना नोटिस दिए आश्रम को तोड़ा गया। जबकि हातोद तहसील के एसडीएम शाश्वत शर्मा के अनुसार दो माह पहले नोटिस भेजा गया था। गत जुलाई में जब बाबा को नोटिस दिया गया था, तब ख़ासा हंगामा हुआ था। बाबा ने मीडिया से कहा था-मैं बाबा हूँ। मेरा कुछ नहीं। नर्मदा तट पर चौदह आश्रम हैं जिन्हें सरकार तुड़वा दे।’ तब बाबा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर भी निशाना साधा था। मोदी से बाबा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में भी लाग-डाँट की और कह दिया कि मोदी जीते तो वे समाधि ले लेंगे।

शिवराज सिंह से उनका पंगा नर्मदा नदी के किनारे भाजपा सरकार द्वारा करवाए गए वृक्षारोपण को लेकर हुआ था। तब बाबा ने कह दिया था कि वे तत्कालीन शिवराज सरकार के बड़े भ्रष्टाचार का ख़ुलासा करेंगे। लेकिन सरकार तब सहम गई और कंप्यूटर बाबा सहित पाँच बाबाओं को राज्यमंत्री का दर्जा दे दिया। इसके बाद बाबा ने अपनी प्रस्तावित नर्मदा रथयात्रा रद्द कर दी थी। 2019 में कंप्यूटर बाबा ने कांग्रेस का दामन पकड़ लिया। 

कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह ने कहा- कांग्रेस पार्टी के ‘स्टार प्रचारक’, महान गोस्वामी, संत शिरोमणि कंप्यूटर बाबा पर कारर्वाई राजनीति से प्रेरित प्रतीत होती है। ये वही लक्ष्मण सिंह हैं जिन्होंने गत फरवरी में कहा था कि उनके पास बाबा की कई शिकायतें हैं और समय आने पर बेनक़ाब करेंगे। कांग्रेस नेता ने कहा था-’बाबा पहले रेत खदान पर जाता है, डराता-धमकाता है और फिर वसूली करता है। ‘

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