भोपाल. इंडिया डेटलाइन. मध्यप्रदेश में मालवा की सात में से सभी सीटों के परिणाम घोषित कर दिए गए। इनमें कांग्रेस को एक, तो भाजपा को छह सीटें मिली हैं। कांग्रेस के एकमात्र विजेता विपिन वानखेड़े पहली बार विधानसभा जाएँगे। वे पिछला चुनाव हार गए थे। वहीं राजवर्धन दत्तीगांव सबसे ज्यादा वोटों से जीते। तुलसी सिलावट ने भी बड़े अंतर से कांग्रेस को हराया। दिलचस्प यह है कि अधिकतर विजेताओं ने अपने ऊपर दल बदलू का स्टिकर लगने के बाद भी 2018 से बड़ी जीत हासिल की। 

सात सीटों के विश्लेषण से पता चलता है कि कुछ सीटें भाजपा के पास वापस लौटी हैं तो भाजपा की  पारंपरिक सीट रही आगर उसके हाथ से छिन गई है।

आगर सीट भाजपा के मनोहर ऊंटवाल के निधन से रिक्त हुई थी जिस पर पार्टी ने उनके बेटे मनोज को उतारा लेकिन वे मैदान में टिक नहीं सके। विपिन ने उन्हें 2210 मतों से परास्त कर दिया। 

विजेता कांग्रेस -विपिन वानखेड़े को 88717 (48.13) 

भाजपा- मनोज ऊंटवाल को 86507 (47.53)

बदनावर में भाजपा के राजवर्धन दत्तीगांव ने पिछले चुनाव में भाजपा से यह छीन सीट छीनी थी जिसे अब कांग्रेस से भी लेकर वापस भाजपा को दे दी है। कांग्रेस के मैदानी जनसंपर्क रखने वाले कमल पटेल मात्र उनचालीस फीसद वोट पा सके। राजवर्धन की जीत का अंतर 32133 है। हालाँकि पिछले चुनाव में वे इकतालीस हजार से ज्यादा वोटों से जीते थे।

भाजपा-राजवर्धन दत्तीगांव 99137 (57.9)

कांग्रेस -कमल पटेल 67004  ( 39.13)

हाट पिपल्या सीट का रंग बदलता रहा है। 2018 के चुनाव में यहाँ भाजपा के दीपक जोशी को कांग्रेस के टिकट पर मनोज चौधरी ने हराया था। अब वे भाजपा टिकट पर पहले से थोड़ी ज्यादा लीड 13904 लेकर जीते। इसके पहले दो चुनाव तक यह भाजपा की सीट रही जो उसके पास लौटकर आई है। कांग्रेस उम्मीदवार राजवीर के पिता राजेन्द्र सिंह विधायक रह चुके हैं।

भाजपा-मनोज चौधरी- 84405 (52.51)

कांग्रेस-राजवीर सिंह बघेल 70501 (43.86)

मांधाता में नारायण पटेल को चुनाव पूर्व तक कमजोर माना जा था लेकिन वे पिछले चुनाव से दससगुना अधिक अंतर 22129 मतों के अंतर से जीते। पिछले चुनाव में उनकी बढ़त मात्र 1236 मतों की थी। इसके पहले यह 2003, 2008 व 2013  से भाजपा की सीट रही। इस तरह यह भी भाजपा के पास लौटकर आई है।

भाजपा-नारायण पटेल 80394 (53.33) 

कांग्रेस- उत्तम पाल 58265 (38.65)

नेपानगर सीट भी तीन चुनावों के बाद गत चुनाव में कांग्रेस की सुमित्रा कास्डेकर् ने छीन ली थी जो इसे लेकर वापस भाजपा में आ गईं। वह भी दस गुना वोटों के अंतर से। 2018 में उन्होंने यह सीट 1264 मतों के अंतर से जीती थी तो अब उनकी लीड 26340 रही। 

भाजपा-कास्डेकर 98881 (53.07)

कांग्रेस- रामकिशन पटेल 72541 (39.4)

साँवेर में सिंधिया के खास व वरिष्ठ मंत्री तुलसी सिलावट लगातार जीतते आ रहे हैं। उन्होंने भी अपनी लीड दस गुना बढ़ाकर 30433 कर ली। उनसे हारने वाले प्रेमचंद गुड्डू वर्ष 1998  में इस सीट से विधायक चुने जा चुके हैं। 

भाजपा- तुलसी सिलावट 78503 (60.16)

कांग्रेस -प्रेमचंद गुड्डू 48070 ( 36.84)

सुवासरा क्षेत्र में पिछला चुनाव महज़ 350 मतों से जीतने वाले हरदीप सिंह डंग ने कमलनाथ से असंतुष्ट होकर कांग्रेस छोड़ी और भाजपा के टिकट पर 29440 मतों की लीड लेकर जीत दर्ज की। वे पिछले दो चुनाव से इस सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इसके पहले यह सीट भाजपा के पास रही।

भाजपा-हरदीप सिंह डंग 117955 (54.45)

कांग्रेस- राकेश पाटीदार 88515 (40.86) 

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