इस तरह की तंग गलियों से पहुंचा बुलडोजर

इंदौर. इंडिया डेटलाइन. जो व्यक्ति कंप्यूटर बाबा की ज़मानत के लिए पाँच लाख रुपए की गारंटी देने वाला था, उसकी शामत आ गई है। प्रशासन ने उसके मकान पर बुलडोज़र चला दिया। उसके दूसरे निर्माणों पर भी टेढ़ी नजर पड़ चुकी है। पुलिस रमेश तोमर नाम के इस शक्ल के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को भी खंगाल रही है। उस पर तीन थानों में 26 मुकदमें थे, जिनमें से तेरह अब भी चल रहे हैं। उसके बेटे आशु तोमर पर भी पाँच से ज्यादा मामले चल रहे हैं। रमेश ने बाबा को इनोवा कार भेंट की थी। 

प्रशासन को पता चला था कि बाबा इनोवा में घूमता है जिसके काग़ज़ात की जाँच करने पर पाया गया कि वह रमेश तोमर के नाम पर है। इसके बाद रमेश की कुंडली तलाशी गई। तो वह भी प्लॉटों पर क़ब्ज़ा करने वाला निकला। उसने इंदरीश कॉलोनी के बग़ीचे पर क़ब्ज़ा कर उन पर दो मोबाइल टॉवर लगवा दिए। नगर निगम ने उसके 800 वर्गफुट के मकान को ढहा दिया।

ग़ौरतलब है कि क़ीमती मोबाइल, लैपटॉप के साथ इनोवा में घूमने वाला कंप्यूटर बाबा भी अवैध क़ब्ज़े के आरोप में 8 नवंबर से जेल में है। राज्य का शिवराज सरकार की उस पर टेढ़ी नजर तब पड़ी जब बाबा ने सरकार व भाजपा  के विरोध में उपचुनाव में ‘लोकतंत्र बचाओं यात्रा’ शुरू की। इसके पहले भी बाबा अपने रसूख़ का उपयोग कर प्रशासन को डराता रहा है। 

कौन है रमेश तोमर

रमेश तोमर ढाई दशक पहले ग्वालियर से इंदौर आया। इंदरीश नगर में किराए की दुकान चलाते हुए उसने एक कॉलोनाइजर से दोस्ती की और प्लॉटों की हेराफेरी करने लगा। उसने हाल में कोरोना काल में बेहतर काम करने वालों को एक्टिवा बाँटी थी। वह और उसका लड़का आशु एक साल पहले तब भी चर्चा में आए जब एक विकलांग के मकान पर क़ब्ज़ा कर लिया। आशु मूसाखेड़ी में खाली प्लॉटों पर क़ब्ज़ा करता था। 

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