फिलाडेल्फिया से भूपेन्द्र सिंह ‘भूपी’ की रिपोर्ट

फिलाडेल्फिया (अमेरिका). इंडिया डेटलाइन. भारत में इन दिनों बराक ओबामा की आत्मकथा की चर्चा है। अमेरिका में इस पुस्तक की पहले ही दिन नौ लाख प्रतियाँ बिक गईं क्योंकि इस समय संयुक्त राज्य में वही सबसे बड़े स्टार हैं। लेकिन अमेरिका के भारतीय समुदाय में इसे लेकर कोई खास हलचल नहीं दिखती। तक़रीबन पूरा देश ही नई सरकार के गठन और हाल में हुए आम चुनाव के विवादों से अपना ध्यान नहीं हटा सका है। कोरोना प्रकोप के गहराने से नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बायडेन अपने गृहराज्य डेलवेअर तक सीमित हैं और देश ट्रंप के दावों-बयानों-हरकतों को देख रहा है। 

निवृत्त हो रहे डोनाल्ड ट्रंप अभी व्हाइट हाउस पर काबिज हैं। हाल में वे कोरोना वैक्सीन के वितरण की व्यवस्थाएँ सुनिश्चित करते नजर आए लेकिन उनकी उससे ज्यादा ऊर्जा अपने चुनाव की पराजय को नकारने में लगी है। वार-पलटवार किए जा रहे हैं। ट्रंप हार मानने को तैयार नहीं हैं। ट्रंप ने अलग-अलग अदालतों में सात से अधिक याचिकाएं डाली थीं जिनमें से छह निरस्त की जा चुकी हैं। लेकिन अकेली याचिका पर ट्रंप को काफी भरोसा है। नई सरकार को बीस जनवरी को सत्ता संभालनी है। अदालत तब तक याचिका का निराकरण कर देगी क्योंकि अमेरिका में मामले बहुत लंबे नहीं चलते। पाठक जानते हैं कि ट्रंप को राष्ट्रपति चुनाव में बायडेन से शिकस्त मिल चुकी है। 

ट्रंप नवनिर्वाचित डेमोक्रेटिकों को ट्रांजीशन नहीं दे रहे हैं। ट्रांजीशन में नवनिर्वाचित सांसद सरकार के कामकाज में मदद देना शुरू कर देते हैं। ट्रंप के रवैये व कोरोना की वजह से इसमें गतिरोध बना हुआ है। ट्रंप की टेक यही है कि मैं तो हारा ही नहीं तब ट्रांजीशन कैसा? इधर, देश अभी ट्रंप के दु:स्वप्न से नहीं निकल सका है। ट्रंप ने असल में अमेरिका की सियासत के मायने व मिज़ाज बदल दिया है। सियासत का मतलब जनता की सेवा ही माना जाता रहा है लेकिन ट्रंपकाल में मनमानापन, पक्षपाती व्यवस्था और भ्रष्टाचार का बोलबाला रहा। चालीस-पैंतालीस बड़े व मालदार घरानों, जिनका प्रतिशत बमुश्किल एक होगा, को ट्रंप ने टैक्स में छूट देकर खुश कर लिया था। इन प्रभावशाली लोगों की मदद से चुनाव में मुद्दों की चर्चा को असरहीन किया गया। बायडेन ने इन लोगों पर लगने वाले 33 फीसद कर को बढ़ाकर 37 प्रतिशत करने का वादा किया था। इसलिए यदि ट्रंप सक्रिय रहे तो वे टैक्स का फ़ायदा लेने वालों को लामबंद रखेंगे। ट्रंप खेमा 2024 का चुनाव लड़ने के मंसूबे भी दिखा रहा है। लोग अमेरिकी राजनीति और प्रशासन में भ्रष्टाचार की चर्चा को ट्रंप काल की सबसे बड़ी देन मानते हैं।

फिलहाल कोरोना ने पूरे अमेरिका को ठहरा-ठिठका दिया है और लोग ऐसे समय एक प्रभावी सरकार की सख़्त और त्वरित जरूरत को महसूस कर रहे हैं। यह खबर लिखते वक्त शनिवार को देश में एक दिन में 2 लाख 01 हजार कोरोना संक्रमित पाए गए हैं और एक दिन में 2 हजार से अधिक मौतें दर्ज हुई हैं। लोगों से घरों में रहने के लिए कहा जा रहा है। दो-चार दिन डेमोक्रेट (बायडेन) की जीत का जश्न मनाने के बाद अब समुदाय में शांति है। 

जहाँ तक भारतीय समुदाय का प्रश्न है तो वह बायडेन की आर्थिक व वैदेशिक नीतियों के लागू होने का इंतज़ार कर रहा है। सेहत बीमा संबंधी नीतियों में परिवर्तन से ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद की जा रही है। माना जाता है कि जब भी डेमोक्रेट सत्ता में आते हैं, बीमा जैसी लोकसेवाओं में रियायतें मिलती है। अभी आम जन पर हेल्थ इंश्योरेंस क़िस्तों का बड़ा भार पड़ रहा है। रिपब्लिकन सरकार ने अपने हाथ सिकोड़कर इसे निजी कंपनियों को दे दिया था। जिससे प्रीमियम बढ़ गए थे। डेमोक्रेट ने इसमें पब्लिक बेनिफिट बढ़ाने का वादा किया है। ये स्वास्थ्य बीमा की उपलब्धता बढ़ाने वाले हैं। इससे राज्य की आय में इज़ाफ़े के अनुमान अर्थशास्त्री रखने लगे हैं। 

पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की आत्मकथा ‘ए प्रॉमिस्ड लैंड’ के पहले खंड के जारी होने की जानकारी बौद्धिक समाज को है लेकिन इसकी अधिक  चर्चा अभी भारतीय समाज तक में नहीं है। भारत में इसकी लगातार खबरें प्रकाशित हो रही हैं। इसकी समीक्षा न्यूयार्क टाइम्स ने रिलीज के पहले ही प्रकाशित की थी। वैसे इस अखबार के संबंध ट्रंप से बेहतर नहीं हैं। इसके मालिक का रुझान डेमोक्रेटिक है। ऐन चुनाव के वक्त इस अखबार ने ट्रंप की कथित टैक्स चोरी का मामला उछाला था। अब ट्रंप पर चल रहे मुक़दमों के भविष्य को लेकर मीडिया में चर्चा है। ट्रंप भ्रष्टाचार के अलावा यौन उत्पीड़न के मामलों में फँसे हैं। तीस महिलाएँ सामने आकर यौनशोषण के आरोप लगा चुकी हैं जिसमें से कम से कम छह ने मुक़दमा कर रखा है।  राष्ट्रपति के विशेषाधिकार हटते ही कुछ और मुकदमे लग सकते हैं।

(भूपी भारत के पंजाब व मध्यप्रदेश में पत्रकारिता करने के बाद इन दिनों संयुक्त राज्य अमेरिका के पेनसिल्विया राज्य में रहते है।) 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here