भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयन के ठीक बाद अंतरजातीय-अंतरधार्मिक विवाह करने वाली टीना डाबी और उनके कश्मीरी पति अतहर आमिर-उल-शफी खान का तलाक आवेदन प्रकरण दूसरे धर्म में विवाह करने वाले लोगों के लिए अग्रिम शिक्षा और चेतावनी हो सकता है।

वेद माथुर 

आईएएस टॉपर टीना डाबी ने अपने कश्मीरी पति अतहर आमिर-उल-शफी खान को तलाक देने के लिए आपसी सहमति से पारिवारिक न्यायालय में अर्जी दाखिल कर दी है। इधर कई सरकारें दूसरे धर्म में विवाह को लेकर कानून भी बनाने जा रही हैं और यह कहा जा रहा है कि यह ‘लव जिहाद’ रोकने का कानून होगा। मैं फिलहाल ‘लव जिहाद’ की व्याख्या में नहीं पड़ना चाहता लेकिन अपना धर्म छुपाकर किसी दूसरे धर्म की युवती से छलपूर्वक विवाह करना नैतिकता और कानूनन दोनों की दृष्टि से गलत है। इस तरह किसी को गुमराह करने वालों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

टीना डाबी और उनके  पति अतहर आमिर-उल-शफी खान को एक दूसरे के धर्म के बारे में ठीक से पता था लेकिन जैसा मैं अक्सर कहता हूं कि दो विपरीत उपासना पद्धति वाले लोगों के विवाह में ढेर सारी बाधाएं हैं और इसके सफल होने की संभावना नगण्य हैं।

मुझे वोटों के लिए किसी का तुष्टिकरण नहीं करना है, न ही मुझे मेरे विचारों के लिए कहीं से पेमेंट लेना है तथा न ही मैं छद्म धर्मनिरपेक्ष और फर्जी ‘अर्बन लिबरल’ हूँ, इसलिए मेरे स्पष्ट विचार हैं: (1) मैं इस बात का पक्षधर हूं कि हिंदुस्तान और पूरी दुनिया में सभी धर्मों के लोग प्यार मोहब्बत से रहें । (2) मैं इस बात का कतई पक्षधर  नहीं हूं कि जहाँ एक धर्म के अनुयायी दूसरे धर्म के अनुयायियों को देखना पसंद नहीं करते हों, वहां एक धर्म की लड़की दुल्हन बन कर दूसरे धर्म के लोगों के बीच में जाएं जहां उनका खानपान, जीवन पद्धति, उपासना पद्धति और कुछ हद तक भाषा विभिन्न हो। पहले हम मोहब्बत से साथ रहना सीखें। (3) यदि मैं यूएसए का निवासी होता और वहां आप मेरी राय पूछते तो शायद भिन्न होती लेकिन भारतीय समाज जहां सब लोग धर्म के नाम पर बंटे हुए हैं, उन्हें पहले एक दूसरे के निकट आना पर होगा, उसके बाद हम ‘ इंटर रिलिजन मैरिज ‘ की बात सोच सकते हैं। (4) हालांकि दूसरे धर्म में जाकर शादी करने वाली वाले विवाहों की सफलता के प्रामाणिक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं लेकिन ऐसे ज्यादातर विवाह असफल होते हैं और उससे भी ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि अनेक बार पति द्वारा पत्नी की हत्या कर दी जाती है घरेलू हिंसा तो आम बात है। अपना नाम बदलकर किसी लड़की को अपना धर्म गलत बताकर तथा गुमराह करके विवाह करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई बनती ही है। (5)  यदि कुमारी एक्स जनाब वाई से शादी कर लें तो व्यक्तिगत रूप से मुझे कोई एतराज नहीं है लेकिन अन्य कुंवारी लड़कियों को मैं अवश्य सलाह दूंगा कि वह दूसरे धर्म में शादी करने से पहले उसके प्रभावों को भी समझ लें।

हमारे देश में समान सिविल कोड नहीं है इसलिए उन्हें इस बात के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना होगा कि वे जिस धर्म में जाकर शादी कर रही हैं उस धर्म के पर्सनल लॉ को भी उन्हें मानना होगा। जिनमें तलाक और पुनर्विवाह ( पहले पति से दोबारा विवाह की अत्यंत पीड़ादायक प्रक्रिया भी) के नियम भी शामिल हैं। हिंदू धर्म में  पुरुषों को सिर्फ एक विवाह की अनुमति होती हैं अतः उन्हें संरक्षण मिलता है जबकि एक अन्य धर्म में पुरुष 4 महिलाओं से कानूनन शादी कर सकता है। (6) हालांकि स्पेशल मैरिज एक्ट 1954 के अनुरूप विवाह करने पर दोनों पक्ष सुरक्षित रहते हैं लेकिन ज्यादातर युवतियों को इन प्रावधानों की ठीक से जानकारी नहीं होती है।(7) मुंबई की फिल्मी दुनिया को छोड़ दें तो हमारे समाज में युवक-युवतियों के परिवारजनों को दूसरे धर्म में विवाह स्वीकार्य नहीं होता है। वे इसका विरोध करते हैं, नवदंपति का बहिष्कार कर देते हैं तथा उनके जीना हराम कर देते हैं । उनकी और समाज की मानसिकता में परिवर्तन लाए बगैर सांप्रदायिक सद्भावना के नाम पर भोली भाली लड़कियों को कुर्बान करना अन्याय पूर्ण है। (8) युवती और युवक  अपनी इच्छा से कानूनन किसी अन्य धर्म में विवाह करने के लिए स्वतंत्र हैं लेकिन उन्हें जोखिम फेक्टर समझाने आवश्यक हैं। (9) तनिष्क के विज्ञापन में दिखाया गया था कि एक मुस्लिम परिवार में हिंदू बहू के गर्भवती होने पर उसकी सास अत्यंत प्यार से उसकी गोद भराई करती है तथा तनिष्क के कीमती जेवर से (जो संभवत: 20-30 लाख ₹ के रहे होंगे) उसे लाद देती है। मैंने समाचार पत्रों में दूसरे धर्म में जाकर शादी करने तथा बाद में हत्या और घरेलू हिंसा के सैकड़ों समाचार पढ़े हैं लेकिन तनिष्क के विज्ञापन जैसा सद्भावनापूर्ण वातावरण मैंने कहीं नहीं देखा। ऐसे में युवतियों को इस विज्ञापन के द्वारा एक फरेब में उलझाने का प्रयास किया जा रहा है। (भारी विरोध के चलते तनिष्क को अपना यह विज्ञापन वापस लेना पड़ा।) (10)  दूसरे धर्म में जाकर विवाह से पहले हमें एक ऐसा वातावरण बनाना होगा कि समाज में सभी धर्म के लोग मिलजुल कर रहें ताकि कोई युवती जब दूसरे धर्म में विवाह होने पर ससुराल जाए तो ऐसा उसे ऐसा अनुभव ना हो कि वह जवानी के जोश और भावनाओं में बहकर कोई बहुत बड़ी गलती कर बैठी है। (11) कई बार खानपान भी रिश्तों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मांसाहारी लोगों को मांसाहार में खुशबू आती है जबकि बहुत से सारे शाकाहारी लोगों को इसमें से बदबू आती है । कई शाकाहारी युवतियों को  ससुराल में मांसाहार पकते देखकर उल्टियां करते भी देखा जाता है। (12) मैंने जो चिंताएं व्यक्त की हैं, उसका एक अंश सुप्रीम कोर्ट भी अपने एक फैसले में व्यक्त कर चुका है।

टीना डाबी और उनके कश्मीरी पति अतहर आमिर-उल-शफी खान का तलाक आवेदन प्रकरण  दूसरे धर्म में विवाह करने वाले लोगों के लिए अग्रिम शिक्षा और चेतावनी हो सकता है। प्रसंगवश, मैं अंतरजातीय विवाहों का दृढ़ समर्थक हूं।

(माथुर प्रसिद्ध व्यंग्य उपन्यास ‘बैंक ऑफ़ पोलमपुर’ के लेखक हैं।) 

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