नई दिल्ली. इंडिया डेटलाइन.  ब्लिंकन अमेरिका के नए राष्ट्रपति जो बाइडेन के विदेश मंत्री होंगे। वर्षों तक बाइडेन के विदेशी मामलों में सहयोगी व सलाहकार रहने वाले एंटोनी जे ब्लिंकन की भारत के बारे में नीति लगभग वही है जो अमेरिका के चुनाव अभियान में बाइडेन व कमला हैरिस के बयानों में झलकती रही है। वे सीमापार आतंकवाद के खिलाफ हैं, चीन को दोनों देशों के लिए समान चुनौती मानते हैं और भारत की वैश्विक भूमिका के पक्षधर हैं लेकिन काश्मीर मामले में वे भारत की मोदी सरकार के कुछ क़दमों से असहमत दिखते रहे हैं। 

58 वर्षीय ब्लिंकन को बाइडेन अमेरिका का नया सेक्रेटरी ऑफ स्टेट नामांकित कर रहे हैं जिनकी अमेरिका के कानून के मुताबिक सीनेट से पुष्टि कराई जाएगी। वे मृदुभाषी है और ज्यादातर रिपब्लिकनों के चहेते हैं। ओबामा काल के उपराष्ट्रपति जो बाइडेन के स्टाफ में आने के पूर्व दो दशक तक सीनेट की विदेशी मामलों की समिति में रहे। इसके बाद वे उपराष्ट्रपति के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनाए गए। राष्ट्रपति ओबामा ने उन्हें प्रमुख उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनाया जिसके बाद 2015 से 17 के मध्य वे डिप्टी फ़ॉरेन सेक्रेटरी (भारत की भाषा में उप विदेश मंत्री) रहे। वे विदेश मामलों में अमेरिका को केन्द्रीय नेता के रूप में स्थापित करने के पक्षधर हैं। 

बाइडेन मैनहट्टन व पेरिस में पले-बढ़े। वे पोलैंड मूल के अपने सौतेले पिता सैम्युएल पिसर, जो अंतरराष्ट्रीय मामलों के वक़ील थे, से प्रभावित रहे हैं। लेकिन माँ व पिता डोनाल्ड ब्लिंकन के कलाप्रेमी होने ने उनके व्यक्तित्व में कलापक्ष को जोड़ा। 

भारत के साथ संबंधों को वे ओबामा काल से देख रहे हैं और बाइडेन के दृष्टिकोण के निर्धारकों में से एक रहे हैं। बाइडेन-ओबामा प्रशासन ने भारत पर अमेरिका द्वारा लगाए गए परमाणु प्रतिबंधों को हटाने में अहम भूमिका निभाई थी। लेकिन हाल में काश्मीर में अनुच्छेद 370 व सीएए के मामले में उन्होंने भारत सरकार के कुछ क़दमों से असहमति जताई थी। उनका कमला हैरिस की तरह, मानवाधिकारों पर जोर था। हालाँकि व्यापक परिप्रेक्ष्य में वे भारत से संबंधों को बढ़ाने का समर्थन करते हैं। गत पंद्रह अगस्त को भारतीय समुदाय के एक कार्यक्रम में उन्होंने भारत के बारे में विचार व्यक्त किए थे। 

ब्लिंकन एक बार नरेन्द्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए लिए गए फैसलों पर भी टिप्पणी कर चुके हैं किंतु इसके बाद भी उन्होंने अमेरिका-भारत के बीच मौजूद बड़े व व्यापक मुद्दों पर अपना ध्यान केन्द्रित करने की बात कही। सीमापार आतंकवाद को आड़े हाथों लेने और चीन को दोनों देशों के लिए समान चुनौती बताने से भारत राहत महसूस कर सकता है। वे संयुक्त राष्ट्र संघ सुरक्षा परिषद में भारत की सीट सुनिश्चित करने का समर्थन करते हैं। एंटोनी कुल मिलाकर विदेश नीति के मामले में बाइडेन के विजन-2020 को सामने रख रहे हैं। इसी के संदर्भ में हमें अमेरिका-भारत के संबंधों का भविष्य देखना होगा।

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