नई दिल्ली. इंडिया डेटलाइन. कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो ने किसान आंदोलन का समर्थन करके भारत सरकार को फिर चिढ़ाया है। इसके पहले भी वे भारतीय नीतियों के विरुद्ध मत व्यक्त करते रहे हैं। अचरज की बात यह है कि एक तरफ वे कृषि पर जारी सब्सिडी को खत्म करने की बात कहते हैं तो दूसरी तरफ किसान आंदोलन के मामले में सरकार को सलाह दे रहे हैं। उनके भारत विरोधी रवैये के कारण वर्ष 2018 में उनकी भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनसे मिलने से इंकार कर दिया था। भारत सरकार ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बताया है। 

जस्टिन ट्रुडो ने कहा वे किसानों को लेकर चिंतित हैं। शांतिपूर्ण आंदोलन करना हर किसी का हक़ है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने ट्रूडो की टिप्पणी को लेकर मीडिया के सवालों पर कहा, ‘हमने भारतीय किसानों से संबंधित कनाडा के नेताओं की टिप्पणियां देखीं जो गलत सूचना पर आधारित हैं। इस तरह की टिप्पणियां बेवजह और बेकार हैं।’

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता राम माधव ने भी कड़ी आपत्ति जताई तो शिवसेना की प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि ट्रूडो भारत के आंतरिक मामलों पर अपनी राजनीतिक रोटी नहीं सेकें। माधव ने ट्रूडो के भारत के आंतरिक मामलों में टिप्पणी के अधिकार को लेकर सवाल उठाया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘उनकी हैसियत क्या है? क्या यह भारत के संप्रभु मामलों में हस्तक्षेप करने जैसा नहीं है?’

भारत सरकार किसान आंदोलन का अंतरराष्ट्रीयकरण किसे जाने की कोशिश से खिन्न है। ट्रुडो ने यह प्रतिक्रिया कनाडा में रह रहे पंजाबियों के दबाव में दी है। कनाडा में बडी संख्या में सिख रहते हैं और वे ट्रुडो के मतदाता भी हैं। ट्रुडो इन्हीं वोटरों का पक्ष ले रहे थे। उन पर कनाडा में खालिस्तान आंदोलन चलाने वालों का भी ख़ासा प्रभाव है जिस पर भारत सरकार निगाह रखती है। खालिस्तानी नेताओं को तवज्जोह देने से नाराज़ नरेन्द्र मोदी ने दो साल पहले ट्रुडो के भारत दौरे में उनसे मिलने से इंकार कर दिया था। 

कनाडा ने अमेरिका और यूरोपीय यूनियन के साथ विश्व व्यापार संगठन के कृषि पर कमेटी में किसानों के हित संबंधी नीतियों और कृषि उत्पादों के व्यापार को लेकर सवाल उठाए थे। इन देशों ने आरोप लगाए थे कि भारत की व्यापार नीति पारदर्शी नहीं हैं और कृषि उत्पादों के व्यापार को लेकर और डेटा मांगे थे। बता दें कि भारत ने किसानों और स्वायत्तता देने के लिए हाल ही में कृषि कानून पारित किए हैं जिससे देश के किसानों को अपनी फसल की अच्छी कीमत के लिए और विकल्प मिल रहे हैं।

कनाडा ने उठाए थे पीएम किसान सम्मान निधि पर प्रश्न

किसानों को लेकर आंसू बहा रहे ट्रूडो सरकार ने ही 22-23 सितंबर 2020 को हुई इस बैठक में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि कार्यक्रम को लेकर जवाब मांगे थे। कनाडा ने पूछा था कि क्या भारत यह बताएगा कि इस योजना के लिए कौन योग्य है और इसके लिए किस तरह की योग्यता का निर्धारण किया गया है। कनाडा ने साथ ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पर भी सवाल उठाए थे। कनाडा ने ग्रीन बॉक्स या WTO के तहत आने वाले सब्सिडी में शामिल होने के लिए भारत की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) पर भी संदेह उठाया था।

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