न्यू जर्सी से सुदेश गौड़ (इंडिया डेटलाइन के लिए विशेष) 

अमेरिका में सबसे बड़े और सबसे पुराने क्षेत्रीय समाचार पत्रों में से एक कंसास सिटी स्टार ने लंबे समय से नस्लवादी कवरेज नीति के लिए अपने पाठकों, खासतौर पर अश्वेत पाठकों से रविवार को माफी मांगी। इतिहास में ऐसे गिने चुने कुछ ही मौके मिलेंगे जब किसी प्रतिष्ठित समाचार पत्र ने अपना संपादकीय दायित्व निष्पक्ष व सकारात्मक तरीके से न निभा पाने के लिए सार्वजनिक तौर पर क्षमा याचना की हो

अमेरिकी अखबारों में कंसास सिटी स्टार का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। अमेरिका के मिसौरी राज्य के कंसास शहर से इसका प्रकाशन पिछले 140  साल से हो रहा है। 1880 में शुरू हुए इस अख़बार में अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन व प्रसिद्ध उपन्यासकार अर्नेस्ट हेमिंगवे भी काम कर चुके हैं। हेमिंगवे तो अपने उपन्यास लेखन में मिली सफलता का श्रेय इस अख़बार के न्यूज रूम में मिली ट्रेनिंग को ही देते रहे हैं। कंसास सिटी स्टार को पत्रकारिता का शीर्ष पुरस्कार पुलित्जर अवॉर्ड एक बार नहीं बल्कि आठ बार मिल चुका है। 2018 के प्राप्त आंकड़ों के अनुसार इसका दैनिक प्रसार 76853 प्रतियां तथा रविवार को 118203 प्रतियों का है।

कंसास सिटी स्टार के संपादक व प्रेसिडेंट माइक फैनिन ने रविवार के अंक में अपने अखबार के नस्लवादी रवैया के लिए माफी मांगी। लिखा कि आज हम आपके साथ एक लोकल बिज़नेस हाउस की स्टोरी शेयर कर रहे हैं जिसने एक समुदाय के साथ कुछ गलत किया है। वह लोकल बिज़नेस हाउस है। कंसास सिटी स्टार जो पिछले कुछ दशकों से अश्वेत नागरिकों के हितों को नज़र अंदाज़ करते हुए उनके पक्ष को डाउनप्ले या गलत तरीके से प्रकाशित करता रहा है। फैनिन ने लिखा कि हमारी इन गतिविधियों ने अश्वेत समुदाय को यथोचित सम्मान, न्याय व  पहचान से वंचित रहना पड़ा। साथ में यह भी माना कि सिटी स्टार प्रबंधन ने अपने विज्ञापन दाताओं व श्वेत पाठकों को ध्यान में रखकर खबरों को पेश किया जो पूरी तरह अनुचित था। प्रबंधन तो अपने लाभ के लिए ऐसा करेगा पर संपादक व उसकी टीम ने भी उचित संपादकीय दायित्व नहीं निभाया। इसके लिए हमें खेद है और क्षमा चाहते हैं।

वे लिखते हैं कि मिनीपोलिस में अश्वेत नागरिक जॉर्ज फ्लायड की दुर्भाग्यपूर्ण हालात में मृत्यु के बाद दुनिया भर में विरोध के बाद हमने भी अपने काम व कवरेज करने के तरीक़े का पुनरावलोकन किया। इस पुनरावलोकन का सुझाव विभागीय चर्चा के दौरान हमारे एक रिपोर्टर मारा रोज विलियम्स ने दिया था। कई दूसरे अख़बारों की रिपोर्टिंग व कवरेज, दस्तावेज, रिसर्च पेपर,पुलिस द्वारा की गई जांच पड़ताल का तुलनात्मक विश्लेषण किया तो खुद को गलत पायदान पर पाया। इस दौरान हमने अपने पुराने संपादकों व रिपोर्टरों से भी बातचीत कर राय जानी। काफी लोगों ने यह स्वीकार भी किया कि हमेशा अश्वेत नागरिकों के ख़िलाफ़ खबरें छापने के कारण हमारे अंदर भी अपराध बोध जागृत होता रहता था। वे कहते हैं कि अश्वेत नागरिकों का काला चित्रण किया जाना आम बात थी। उनकी उपलब्धियों, आकांक्षाओं को कभी भी उचित स्थान नहीं दिया गया। स्थानीय अश्वेत सांस्कृतिक प्रतिभाओं को हमेशा कम स्थान दिया गया जबकि संपन्न श्वेतों को जरूरत से ज्यादा स्थान दिया जाता रहा। कुछ सेवानिवृत्त पत्रकारों ने तो पूर्व संपादक राय राबर्ट्स का नाम लेकर कहा कि वे कहते थे कि अश्वेतों के लिए न ज़्यादा स्याही खराब करो और न ही ज्यादा जगह। इन्हीं राय राबर्ट्स को 1948  में टाइम मैगज़ीन के कवर पर जगह मिली थी। उन्होंने कवर पेज पर यह स्थान कैसे पाया था, इसके चर्चे आज भी पुराने स्थानीय  पत्रकारों से सुने जा सकते हैं।  फैनिन लिखते हैं कि ऐसा करके हमने सामाजिक वैमनस्यता को ही बढ़ावा दिया जबकि हमारी ज़िम्मेदारी थी कि सामाजिक सद्भावना को पुष्ठ किया जाए।

फैनिन मानते हैं कि हमारी आज की यह स्वीकारोक्ति हमें अपराध बोध से मुक्त कर सद्भावना के नए मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करेगी। उन्होंने कहा कि अबतक जो कुछ भी हुआ है उसकी ज़िम्मेदारी से हम बच नहीं सकते हैं। हमे अपने इतिहास को स्वीकार करना ही होगा।

भारतीय पत्रकारिता में इतनी साफगोई कब आएगी, हम सबको इंतजार रहेगा। (इंडिया डेटलाइन)

( गौड़ नईदुनिया भोपाल व दैनिक भास्कर के संस्करणों में संपादक रह चुके हैं।)

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