साप्ताहिक स्तंभ/ राजनीति प्रसाद

वैसे तो भारतीय जनता पार्टी के लौहपुरुषों को कई प्रदेशों में उछल रहे कंकड़ों की आवाज़ें सुनाई दे रही होंगी लेकिन राजस्थान से पत्थर फेंका गया। मोदी-अमित की मूर्ति पर लगकर टन्न जरूर बोला होगा। वसुंधरा राजे ने मोदी टीम द्वारा भाव नहीं दिए जाने से भाँप लिया कि अब भाजपा में भविष्य ख़तरे में पड़ रहा है। सो, अलग संगठन खड़ा करना शुरू कर दिया। ‘वसुंधरा राजे समर्थक राजस्थान मंच’  के पच्चीस जिला अध्यक्षों के नाम की सूची घूमती हुई जेपी नड्डा तक पहुँची। उन्होंने हाल में राजस्थान के वरिष्ठ नेताओं को दिल्ली बुलाकर बात की। वसुंधरा को नहीं बुलाया। वसुंधरा 2023 की तैयारी अपने बल पर करना चाहती हैं। नए संगठन के अध्यक्ष विजय भारद्वाज कहते हैं – मोदी विकास मंच, नमो मंच व टीम सतीश पूनिया ( राज्य भाजपा अध्यक्ष) बन सकते हैं तो टीम वसुंधरा या वसुंधरा समर्थक मंच क्यों नहीं? 

मत्था टेकने की राजनीति

कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर बुरे फँसे हैं। किसानों के आंदोलन से डेढ़ महीने से चैन की साँस नहीं। इससे 2निकलने के लिए आठवें दौर की बातचीत से एक दिन पहले गुरुद्वारे में मत्था टेक आए। गुरु राखा यानी गुरू रक्षा करे। लुधियाना के गुरुद्वारा मानकर के संत लक्खोवाल से मिलकर आए। पंजाब में उनकी बड़ी पूछ है। बाबा को बताया कि कृषि कानूनों का कई राज्यों के किसान समर्थन भी कर रहे हैं। बाबा ने सलाह दी कि कृषि कानूनों को लागू करने-न करने का विकल्प राज्यों पर छोड़ दीजिए।  वैसे प्रधानमंत्री भी दिल्ली के गुरुद्वारा में मत्था टेककर आए थे।उनकी भी फ़ज़ीहत यह है कि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने गुरु तेगबहादुरजी की जन्मशताब्दी में बुलाने से इंकार कर दिया है। 

शिवसेना डाल-डाल, कांग्रेस पात-पात 

महाराष्ट्र में तीन दलों की खिचड़ी कुछ बेस्वादी हो चली है। शिवसेना और कांग्रेस में हालाँकि पहले भी कुछ खिंचाव के मौके आते रहे लेकिन सुलट गए। पर इस बार शिवसेना संभाजीनगर के मसले पर अकड़ी है और कांग्रेस के नेताओं की घुड़कियों पर झुकने की बजाय सार्वजनिक जवाब दे रही है। शिवसेना औरंगाबाद का नाम संभाजीनगर रखने के पक्ष में है। उद्धव ठाकरे के पिता बाल ठाकरे मे यह नामकरण किया था। इस पर कांग्रेस को आपत्ति है। उद्धव ने इस दरकिनार कर मुख्यमंत्री के ट्वीटर हैंडल से संभाजीनगर का जिक्र किया। कांग्रेस ने कहा कि उनका गठबंधन धर्मनिरपेक्ष मूल्यों पर बना है तो उद्धव ने पूछा कि औरंगज़ेब क्या धर्मनिरपेक्ष था? कांग्रेस इन अनपेक्षित तेवरों से सहमी है। 

आंध्रप्रदेश में हिंदुत्व बनाम ईसाइयत

आंध्रप्रदेश में हिंदुत्व नाम ईसाइयत इस समय राजनीति का गरमागरम मुद्दा है। इसे भारतीय जनता पार्टी नहीं, नहीं तेलुगु देशम के चंद्रबाबू नायडू मुद्दा बना रहे हैं। विजयनगरम जिले के 400 साल पुराने रामतीर्थ मंदिर में राम की प्रतिमा को खंडित करने का मुद्दा बनाकर चंद्रबाबू नायडू राज्य की यात्रा कर रहे हैं और हिंदुत्व के मामले में मुख्यमंत्री जगन रेड्डी पर सीधे हमले कर रहे हैं। वे कहते हैं कि हिंदुओं को न्याय मिलने की कोई उम्मीद इसलिए नहीं है क्योंकि मुख्यमंत्री, गृहमंत्री सुचारिता और पुलिस महानिदेशक गौतम सवांग सभी ईसाई हैं। जगन रेड्डी के राज में सौ फीसद ईसाई गांव बढ़ते बनाए जा रहे हैं और हिंदुत्व ख़तरे में है। उधर भाजपा ‘राम बनाम रोम’ का राग अलाप रही है।  (इंडिया डेटलाइन)

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