भोपाल. इंडिया डेटलाइन . मध्यप्रदेश भाजपा में नेता पुत्रों की लांचिंग चल रही है। नेता पुत्र एक दूसरे के हाथ में हाथ डालकर आगे बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के पुत्र कार्तिकेय अब पिता की तरह ‘फुलफार्म’ में उतरे है और उनके लिए बक़ायदा पूरा लांचिंग प्लान तैयार किया गया है। इंदौर में वह शिवराज के साथी कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश के गलबहियां डालकर राजनीति के पालने में झूल रहे थे तो सागर में शिवराज के ही सहयोगी मंत्री भूपेन्द्र सिंह के बेटे अभिराज को अंगुली पकड़ाकर साथ ला रहे थे। अभिराज की भी यह लांचिंग थी। उन्होंने भी भाषण दिया और खुली जीप में कार्तिकेय के साथ घूमकर जनता का अभिवादन किया।

प्रदेश में भाजपा का नेतृत्व शिवराज सिंह को पहली बार मुख्यमंत्री चुने जाते समय उस पीढ़ी के हाथों में आया था जो युवा मोर्चा से निकलकर आई थी। तब सुंदरलाल पटवा, कैलाश जोशी, बाबूलाल गौर जैसे वरिष्ठों के हाथ से बागडोर निकालकर युवकों को सौंपी गई। अब इससे आगे की पीढ़ी को तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। यह आधिकारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी द्वारा योजित है, ऐसा नहीं लगता। यह वास्तव में तो नेता पिताओं द्वारा पुत्रों को उत्तराधिकारी बनाने की प्रक्रिया है। इनमें शिवराज पुत्र सबसे आगे हैं। उन्होंने हाल में ताबड़तोड़ दौरे किए हैं और खूब मजमा जुटाया, धाराप्रवाह बोले व राजनीतिक परिपक्वता के लक्षण दिखाने शुरू किए। 

भूपेंद्र सिंह के पुत्र के साथ

मप्र भाजपा में नेता पुत्रों की लंबी पाँत है। यह संयोग है कि हर प्रमुख नेता का बेटा उत्तराधिकार संभालने की तैयारी कर रहा है। कार्तिकेय, आकाश व अभिराज के अलावा केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर के बेटे देवेन्द्र प्रताप सिंह व प्रबल प्रताप सिंह, मंत्री गोपाल भार्गव का बेटा अभिषेक, केन्द्रीय मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल का पुत्र प्रबल सिंह पटेल व पूर्व मंत्री गौरीशंकर शेजवार का बेटा मुदित अग्रिम पंक्ति में हैं। यद्यपि शेजवार का बेटा पिछला विधानसभा चुनाव हार चुका है जबकि आकाश विजयवर्गीय विधायक हैं। अभिषेक के बढ़ते क़दमों को स्थानीय राजनीति ने फिलहाल ठिठका दिया है। लेकिन यह स्पष्ट है कि युवा पुत्रों की यह पौध भाजपा के भविष्य की रचना कर रही है। दिलचस्प है कि किसी नेता की बेटी नहीं है। 

यह भी देखने योग्य है कि कांग्रेस में भी यह पीढ़ी बढ़ रही है। हालाँकि वह उम्र में भाजपा नेता पुत्रों से कुछ बड़ी है। दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन कमलनाथ सरकार में मंत्री थे तो कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ सांसद हैं। सज्जन सिंह वर्मा के पुत्र भी मैदान में आ गए हैं। 

चलिए, फिर अपने मुख्य किरदार कार्तिकेय पर आते हैं। कार्तिकेय ने यद्यपि पिछले विधानसभा चुनाव में प्रचार किया था लेकिन तब वे किसी न किसी बड़े नेता की छत्रछाया में थे और चुनाव में परिवार के सदस्यों का उतरना सहज और सामान्य बात माना जाता है। इस बार वे स्वतंत्र रूप से जिलों का दौरा कर रहे हैं और वह पहले से ज्यादा आत्म विश्वास से भरे हैं। कार्तिकेय ने इंदौर के बाद सागर व विदिशा जिले का दौरा किया। सागर के पत्रकार विनोद आर्य कहते हैं कि कार्तिकेय ने पहली बार बुंदेलखंड में किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में शिरकत की।  हर जगह उनके दौरे का प्रायोजन शिवराज का कोई न कोई साथी या उनकी पीढ़ी का कोई नेता था। सागर में उन्हें शिवराज के साथी व मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने अपने खुरई विधानसभा क्षेत्र के मालथौन में क्रिकेट मैच में बुलाया और युवाओं की भारी भीड़ जुटाई। सागर, खिमलासा, मालथौन, बीना, कुरवाई-रास्ते भर स्वागत ओर संबोधन की माला गूँथी गई। 

कार्तिकेय में शिवराज का पूरा अक्स नजर आ रहा था। उनकी भाषण शैली ठीक पिता की तरह। लटके-झटके भी तक़रीबन वैसे ही। सागर में खुद बताया कि कैसे एक बुज़ुर्ग माला लेकर अकेले खड़े हुए थे तो वे रुके और उनकी माला ली। उनका सम्मान किया।  मुख्यमंत्री पिता की नीतियों व उपलब्धियों का बखान किया। कहा- मामा इस बार फुलफार्म में हैं। पत्रकारों द्वारा पूछे जाने पर कि राजनीति में युवाओं की क्या भूमिका देखते हैं? कार्तिकेय ने कहा-‘देश व भाजपा की राजनीति में युवाओं का बड़ा योगदान है। चाहे मोदीजी हों, मुख्यमंत्री चौहान या भूपेन्द्र चाचा, सबने युवा अवस्था में राजनीति शुरू की और कामयाब हुए।’ कार्तिकेय का मुख्यमंत्री की तरह ही स्वागत होता है। 

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