साप्ताहिक स्तंभ/ राजनीति प्रसाद

श्चिम बंगाल में तृणमूल नेताओं का भाजपा की तरफ प्रवाह बढ़ रहा है और ममता बैनर्जी, उनके भतीजे अभिषेक और चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर कोज इस धार को रोकने के लिए बाँध बनाने की सोचते हैं। पर उनके बनाए कई तटबंध हाल में टूट चुके हैं। यह जरूर है कि दल छोड़ने वालों को रोकने की ख़ातिर ममता ने अपनी अकड़ कम की है और खुद ऐसे नेताओं से बात कर रही हैं। एक बड़े नेता शुभेन्दु से बात की गई पर वह नही रुके। लेकिन शुक्रवार को बड़ी कामयाबी शताब्दी राय को रोकने में मिली। शताब्दी एक्सप्रेस दनदनाते हुए शनिवार को दिल्ली जाने वाली थी और भाजपा के प्लेटफ़ार्म पर ग्रीन सिग्नल मिल चुका था। शताब्दी ने फ़ेसबुक पर अपनी पार्टी के नेतृत्व की आलोचना करते हुए लिखा था-दिल्ली में साधारण नहीं, बड़े नेता से मुलाकात होगी।16 जनवरी को दोपहर 2 बजे। इसके बाद तृणमूल में ज़ंजीर खींचने की कोशिश शुरू हुई। एक नया प्लेटफार्म भी दे दिया-उपाध्यक्ष बना दिया। अब कैलाश विजयवर्गीय ने 41 विधायकों के भाजपा के संपर्क में होने की बात कहकर फिर नींद हराम कर दी है। 

शाहनवाज़ खान की बिहार वापसी 

टीवी पर शालीनता से बोलने वाले भाजपा के जगीन राष्ट्रीय प्रवक्ता व पूर्व केंद्रीय मंत्री शाहनवाज़ खान को बिहार में विधान परिषद का चुनाव क्यों लड़वाया जा रहा है, रविवार को मोदी-शाह की इस राजनीतिक पहेली को बूझा जाता रहा। शाहनवाज़ भाजपा के राष्ट्रीय मंच पर अपनी भूमिका बख़ूबी निभा रहे थे और हाल में उन्होंने जम्मू काश्मीर में जिला विकास परिषदों के चुनाव में भाजपा को अच्छी जीत दिलाई। तब उन्हें राज्य की राजनीति में भेजकर पुरस्कार दिया जा रहा है या दंड? कुछ सयानों का अनुमान है कि उन्हें भाजपा बिहार में मुसलमान वोटों के मद्देनजर भविष्य में राज्य के नेता के तौर पर तैयार करेगी। सुशील मोदी के बाद बड़े लोकलुभावन चेहरे की जरूरत है। हालाँकि क्षेत्रीय स्तर पर उसके पास कई नेता हैं। 

चाचा नॉन सीरियस पॉलीटिशियन

राजनीति रिश्ते-नातों को भी खराब कर देती है। अब देखिए, हरियाणा में दुष्यंत चौटाला उपमुख्यमंत्री बन गए तो अपने ही चाचा को नॉन सीरियस पॉलीटिशियन कहने लगे। चाचा अभय चौटाला इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) में हैं और दुष्यंत ने नई पार्टी जननायक लोकदल बना ली है। चंडीगढ़ में शनिवार को पत्रकारों ने अभय के बारे में दुष्यंत से सवाल कर लिया। दुष्यंत ने जवाब नहीं दिया लेकिन सीधे-सीधे नो कमेंट कहने की बजाय टांट मार दिया-हम केवल सीरियस पॉलीटिशियन पर ही टिप्पणी करते हैं, नॉन सीरियस पर नहीं। इसके पहले वे कांग्रेस के भूपेन्द्र सिंह हुड्डा पर लंबी टिप्पणी कर चुके थे। 

नेता को नश्तर पहले क्यों नहीं

कांग्रेस के नेता दिल्ली से भोपाल तक कह रहे हैं कि कोरोना वैक्सीन सबसे पहले प्रधानमंत्री मोदी को लगवाना चाहिये थी। इसी तरह मप्र में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को। भोपाल में एक पत्रकार वार्ता में कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जीतू पटवारी ने तो कहा कि शिवराज टीका लगवाते तो कमलनाथ भी लगवाते और मैं भी लगवाता। यानी सभी नेता लगवाते। लेकिन उन्हें तेलंगाना की खबर सुननी चाहिए। इस राज्य के स्वास्थ्य मंत्री एटापल्ली राजेन्दर ने ऐलान किया था कि वह सबसे पहले टीका लगवाएंगे। किन्तु प्रधानमंत्री ने उन्हें सलाह दी कि यदि आप सबसे पहले यह हक़ लेंगे तो पीछे-पीछे सब नेता लाइन में लग जाएँगे। इससे कोरोना से लड़ रहे स्वास्थ्य कर्मी पीछे रह जाएँगे। इसलिए पहले उनका वैक्सीनेशन होने दीजिए। इस सलाह के बाद स्वास्थ्य मंत्री पीछे हटे। (इंडिया डेटलाइन)

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