सुदेश गौड़

 

भोपाल की अशोका गार्डन पुलिस ने 20 जनवरी को मप्र धार्मिक स्वतंत्रता अध्यादेश (लव जिहाद) के तहत पहला मामला दर्ज कर कार्रवाई की है। एक मुस्लिम युवक नाम बदलकर और अपना धर्म छिपाकर हिन्दू लड़की से इलू-इलू कर रहा था। लड़की को जब प्रेमी की धार्मिक वास्तविकता पता चली और यह बात छिपाने का कारण जानना चाहा तो वह आक्रामक हो गया। तब अपने साथ हुए छल से व्यथित लड़की पुलिस की शरण में गई।

अगर यह क़ानून न बना होता तो हमेशा की तरह इस मामले पर भी किसी का ध्यान नहीं जाता। यह सब षडयांत्रिक गतिविधियां ऐसे ही चल रहीं होती। न किसी का ध्यान जाता न कोई हाय-तौबा मचती। ऐसा भी नहीं है कि इस तरह की घटना इतिहास में पहली बार भोपाल के अशोका गार्डन में घटी है। पहले भी ऐसा होता रहा है पर हिन्दूओं ने अपनी इनबिल्ट सहनशीलता, सदाशयता व विनम्रता के कारण ऐसे मामलों को तूल नहीं दिया। हमारी इस आदत को विधर्मियों ने हमारी कमजोरी समझ लिया और हमारे ख़िलाफ़ अपनी साजिशों व षड्यंत्रों को गति दे दी।

मध्यप्रदेश में लव जिहाद विरोधी विधेयक ‘धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2020’ को 26 दिसंबर को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई थी। इस कानून में कुल 19 प्रावधान रखे गए हैं, जिसके तहत धर्म परिवर्तन के मामले में शिकायत मिलने पर पुलिस कठोर कार्रवाई करेगी। अगर किसी व्यक्ति पर नाबालिग, अनुसूचित जाति/जनजाति की बेटियों को बहला- फुसला कर शादी करने का दोष सिद्ध होता है तो उसे दो साल से 10 साल तक की सजा दी जाएगी। यदि कोई व्यक्ति धन और संपत्ति के लालच में धर्म छिपाकर शादी करता हो तो उसकी शादी शून्य मानी जाएगी।

इसी प्रकार के क़ानून को उत्तरप्रदेश कैबिनेट ने 24 नवंबर को मंज़ूरी दी थी, तत्पश्चात्  27 नवंबर को राज्यपाल की मजूरी मिलने के बाद पूरे प्रदेश में लागू कर दिया गया था। पहले एक महीने में उप्र में धर्मांतरण रोधी अध्यादेश के तहत 35 लोगों को गिरफ्तार किया है।

इन कानून को लेकर प्रगतिशीलता का ढोंग करने वाले, शाहीन बाग के प्रणेताओं व सीएए- एनआरसी का विरोध करने वालों के कलेजे पर सांप लोट गया। लोकतंत्र व मानवाधिकारों पर हमला तक कह डाला। उन्हीं लोगों ने कल रात अमेरिका के नए राष्ट्रपति जो बाइडेन को अपनी पारंपरिक बाइबिल पर हाथ रखकर शपथ लेते हुए देखा। क्या अमेरिका में बाइबिल को लेकर किसी ने कहा कि अब दूसरे धर्मावलंबियों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है? शपथग्रहण कार्यक्रम में बाइबिल के उद्धरणों को उद्धृत किया गया। कार्यक्रम के बाद चर्च में हुए कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अतिथियों ने भाग लिया। क्या इन सबसे अमेरिका में किसी भी वर्ग में असुरक्षा की भावना व्याप्त हुई? हमारे यहाँ मोदी जब बाबा विश्वनाथ की पूजा अर्चना करते हैं या अयोध्या में राम मंदिर के लिए भूमिपूजन करते हैं तो सेकुलरिज्म खतरे में पड़ जाता है। योगी के भगवा वस्त्र देख कर उनको सैफरन टैररिज्म दिखने लगता है। यदि वहां ऐसा कुछ नहीं हुआ तो हमारे यहां हर छोटी सी बात से कुछ लोग असुरक्षित क्यों महसूस करने लग जाते हैं? इस देश की सांविधानिक संस्थाओं व व्यवस्थाओं जैसे चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट, सीबीआई, इनकम टैक्स, ईवीएम आदि पर सवाल खडे़ कर के शंकास्पद बनाना इनका मुख्य मकसद होता है। इनका काम सिर्फ़ सवाल खड़ा करना होता है ताकि अराजकता व्याप्त हो जाए।

ऐसे हालात में हमारी ज़िम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। उनकी रणनीति को समझकर उसे विफल करना तो प्राथमिक काम है पर उससे भी जरूरी है कि ऐसे हालात बनाएं जाएं कि वे ऐसी कुत्सित षड्यंत्रों की संरचना के पहले सौ बार सोचें। (गौड़ नवदुनिया भोपाल व दैनिक भास्कर के संस्करणों में संपादक रहे हैं।)

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