नीति आयोग ‌की इंडिया इनोवेशन रिपोर्ट

 

भोपाल. इंडिया डेटलाइन. नीति आयोग की रैंकिंग में मध्यप्रदेश को तेरहवाँ स्थान मिला है। इस तरह यह एक सीढ़ी चढ़ा। लेकिन कुछ क्षेत्रों में राज्य को कई क़दम उठाने होंगे अर्थात् विकसित राज्य बनने के लिए काफी चलना है। नीति आयोग ने ‘इंडिया इनोवेशन रिपोर्ट-2020’ शीर्षक रिपोर्ट में मानकों को सामने रखकर बताया है कि हमारे प्रदेश को किन मामलों में सुधार और नवाचार करने की जरूरत हैै।‌

आयोग के ताजा नवाचार सूचकांक में मध्यप्रदेश शीर्ष दस में सम्मिलित नहीं है जबकि हिंदी राज्यों में उत्तरप्रदेश ने इसमें स्थान प्राप्त किया है। मप्र को सत्रह राज्यों की सूची में तेरहवाँ स्थान मिला है और वह गत वर्ष से एक क्रम ऊपर गया है। राज्यों की रैंकिंग में कर्नाटक पिछले वर्ष की तरह शीर्ष पर है जिसका कुल स्कोर 42.5 है जबकि मध्यप्रदेश को 20.82 अक मिले। इसके पीछे मात्र चार राज्य उड़ीसा, झारखंड, छत्तीसगढ़ व बिहार हैं। राजस्थान इसके ठीक ऊपर है तो उत्तरप्रदेश नौवें क्रम पर है अर्थात वह शीर्ष दस राज्यों में शामिल है। इस रैंकिंग में पहाड़ी राज्य व केन्द्र शासित प्रदेश शामिल नहीं हैं। यदि इन्हें भी गिना जाए तो मप्र की रैंक बीसवें क्रम पर पहुँच जाएगी।

अलग-अलग मदों में सत्रह राज्यों की सूची में मप्र की प्रगति को मापें तो इनेबलर्स में यह बारहवें (25.40- शीर्ष राज्य केरल 36.97) और परफारमेंस में ग्यारहवें ( 16.24-कर्नाटक 50.19) पर खड़ा है। निवेश में हमारा नौवाँ स्थान (7.47-कर्नाटक 33.01) तो मानव पूँजी में तेरहवाँ (32.70) क्रम है। ज्ञान कार्यकर्ता के मामले में मप्र को दसवाँ (8.36- महाराष्ट्र 22.21) और व्यवसाय के योग्य वातावरण में तेरहवाँ (14.20- केरल 37.12) स्थान मिला। सुरक्षा व विधिक वातावरण में हमने बहुत अच्छा प्रदर्शन करते हुए चौथा स्थान ( 63.66 -पंजाब 67.91) बनाया।

मानव पूँजी व अन्य कई पैमानों पर दक्षिण के राज्योँ का बेहतर प्रदर्शन है। इसमें पीएचडी में दाख़िला, अभियान्त्रिकी व तकनीकी शिक्षा में प्रवेश, सूचना प्राद्यौगिकी के माध्यम से शिक्षा, शिक्षक-छात्र अनुपात व उच्च शिक्षा संस्थानों की उपलब्धता जैसे मानकों पर प्रदेशों को तौला गया है। मध्यप्रदेश में पीएचडी करने वालों के पंजीयन पर महज़ 6.91 अंक मिले जबकि राष्ट्रीय उपलब्धता सर्वे (कक्षा दसवीं) में हमें 78.96 अंक मिले। नैक प्रमाणित उच्च शिक्षा संस्थानों के मामले में हमें सिर्फ 3.64 प्रतिशत स्कोर मिला।

व्यवसाय के वातावरण में हमें कॉमन फ़ैसिलिटी सेंटर में मात्र 0 अंक मिले तो इनक्यूबेटर सेंटर पर 1.51 व ऑनलाइन सर्विस ट्रांजेक्शन पर 5.8 अख। हाँ, व्यवसाय की सुविधा के मामले में 89.29 स्कोर शानदार रहा। इसी तरह निवेश में विज्ञान व तकनीक पर ख़र्च, पूँजी निवेश को देखा गया तो नॉलेज वर्कर में शिक्षा की गुणवत्ता, शोध व नवाचार को मापा गया। इसमें हिमाचल प्रदेश शीर्ष पर रहा। शिक्षा की उपलब्धता व गुणवत्ता के बीच भारी अंतर पर नीति आयोग ने चिंता जताई है।

नीति आयोग की रिपोर्ट को दृष्टिगत रखकर प्रदेश को कई क्षेत्रों में बड़े सुधार करने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने राज्य को विकसित राज्य बनाने का संकल्प लिया है तो इसके लिए कई क़दम उठाने की जरूरत होगी। वैसे गत वर्ष की तुलना में राज्य एक पायदान ऊपर चढ़ा है।

भारत रैंकिंग में ऊँचे पायदान पर 

भारत वैश्विक नवाचार सूचकांक में लगातार ऊपर जा रहा है। इस वर्ष दुनिया के 131 देशों में उसकी रैंक 48 वीं है जबकि 2015 में वह 81 वे क्रम पर था। भारत की दिक़्क़त यह है ति वह शोध व विकास पर मात्र अपनी कुल सकेगी घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 0.7 प्रतिशत ख़र्च करता है जबकि इसराइल जैसा छोटा देश 4.95 प्रतिशत। नवाचारसूचकांक को पाँच आधार पर तय किया जाता है-मानव पूँजी, निवेश, ज्ञान कार्यकर्ता (जिसमें कर्मचारियों की कुशलता शामिल है) , व्यावसायिक वातावरण व सुरक्षा और विधिक वातावरण।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here