नई दिल्ली. इंडिया डेटलाइन. पिछले सप्ताह राहुल गांधी केरल में ट्रैक्टर चलाकर राजनीति की फसल बोने की कोशिश कर रहे थे, किन्तु नया हफ्ता शुरू होते ही उनकी दक्षिण के आखिरी राज्य में फसल उखड़ गई। इसके एक दिन बाद मंगलवार को गुजरात में तगड़ा झटका लगा, जब सबसे बड़े नगर निगम सूरत में आप ने उसे तीसरे क्रम पर धकेल दिया। कहने को यह नगर निगम का चुनाव है किन्तु इसने कांग्रेस के भविष्य को लेकर बड़ा संकेत दिया।
मंगलवार को गुजरात की छह नगर निगमों के चुनाव नतीजों में भाजपा ने कांग्रेस को एकदम कोने में समेट दिया। समाचार लिखे जाने तक अहमदाबाद, राजकोट, जामनगर, भावनगर, वड़ोदरा व सूरत के 556 चुनाव परिणाम आ चुके थे जिनमें से 472 पर भारतीय जनता पार्टी विजयी हुई जबकि कांग्रेस को मात्र 46 सीटें मिलीं। 38 सीटें निर्दलीय व अन्य के खाते में गईं। कुल 576 सीटों के लिए चुनाव लड़े गए थे। कांग्रेस की यह दशा उस राज्य में है जहां उसने पिछला विधानसभा चुनाव जीतने के लिए लड़ा था और तीन युवाओं के भरोसे भाजपा को चुनौती दी थी। इनमें से एक तत्कालीन युवा नेता हार्दिक पटेल अब उसकी राज्य इकाई के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। सूरत का चुनाव उन्हीं के नेतृत्व में लड़ा गया।
सूरत की शक्ल ने कांग्रेस ने आईना दिखा दिया है। वहां पहली बार आम आदमी पार्टी (आप) ने 27 सीटें जीतीं। यह निगम चुनाव में पहली बार उतरी। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उसने कांग्रेस को तीसरे क्रम पर धकेल दिया। देश में जहां-जहां कोई क्षेत्रीय या अन्य मजबूत दल उभरकर आया है, कांग्रेस तीसरे और चौथे क्रम पर चली गई है। उप्र, बिहार, उड़ीसा, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में वह जबसे सत्ता से गई, लौटकर स्वतंत्र रूप से नहीं आ सकी। उसकी जगह क्षेत्रीय दलों ने ले ली। यही भविष्य अब गुजरात ने दिखा दिया। यही नहीं, उसने अब हिंदी राज्यों में उसके आगे विकल्प खड़ा कर दिया। यह पहला मौका है जब आप ने दिल्ली से निकलकर किसी राज्य में सीटे जीती।

दक्षिण से बंधा बोरिया-बिस्तर
दक्षिण भारत में कांग्रेस की बची-खुची अंतिम सरकार पुदुचेरी में थी जो सोमवार को गिर गई। मुख्यमंत्री नारायण सामी ने बहुमत खो दिया जिससे उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। दक्षिण में कर्नाटक की सरकार गत वर्ष उसके हाथ से छिन गई थी। पुदुचेरी में मुख्यमंत्री नारायण सामी के खिलाफ विधायकों में जबर्दस्त असंतोष थी जिसे हाईकमान संभाल नहीं सका। कुछ दिन पहले ही राहुल गांधी पुदुचेरी गए थे लेकिन उन्होंने यहां की जमीनी हकीकत से आंखें मूंदी। नारायण सामी दस जनपथ के खासमखास थे और चुनाव पुदुचेरी में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद उन्हें दिल्ली से सत्ता संभालने के लिए वहां भेज दिया गया था। तब से ही असंतोष के बीज पड़ गए थे। गत जनवरी में जब दो विधायक पाला बदलकर भाजपा में गए, तब भी आलाकमान नहीं चेता। यही राहुल गांधी की कार्यशैली की खामी है। सोमवार को तैतीस विधायकों के सदन में कांग्रेस विधायकों की संख्या चौदह ही रह गई जबकि विपक्ष के खेमें में सोलह विधायक खड़े थे। नारायण सामी सरकार का पूरे समय उपराज्यपाल किरण बेदी के साथ विवाद चलता रहा। केंद्र ने पिछले सप्ताह किरण बेदी को बर्खास्त करके नारायण सामी को विक्टिम कार्ड खेलने से रोक दिया।

कांग्रेस से दक्षिण भी गया

कांग्रेस के लिए दक्षिण में लौटना मुश्किल होता जा रहा है। राहुल गांधी भले ही केरल में अपने संसदीय क्षेत्र वायनाड के ताबड़तोड़ दौरे कर रहे हों (अमेठी से सबक लेकर) लेकिन वहां हाल के निगम चुनाव में सत्तारूढ़ वाममोर्चा और मजबूत होकर उभरा है और अगले विधानसभा चुनाव की उसकी जमीनी तैयारी है। कर्नाटक में वह जनता दल यूनाइटेड के साथ मिलकर सत्ता मेे आई थी। अब जनता दल भी छिटक गया। तमिलनाडु में वह द्रमुक का जूनियर पार्टनर है।

राहुल की विफलता

दिलचस्प बात है कि राहुल गांधी की अगुवाई (अपदेन अध्यक्ष) में तमाम चुनाव अभियान या तैयारी अभियान चल रहे हैं और पार्टी की जमीन बुरी तरह खिसक रही है लेकिन राहुल को अध्यक्ष बनाने की मांग कांग्रेस में लगातार हो रही है। वे पुदुचेरी व गुजरात के नतीजों के बाद विपक्षियों के तीखे निशाने पर आ गए हैं। सोश्यल मीडिया पर उनके मीम बन रहे हैं और टिप्पणियों में मजाक उड़ाया जा रहा है। पु्दुचेरी में उनके पदार्पण को लेकर कहा जा रहा है कि जहां-जहां पांव पड़ें संतन के, वहां वहां बंटाधार। स्मृति ईरानी ने उनके भाषण का क्लिप लगाकर लिखा-थोथा चना, बाजे घना। मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा-पहले उत्तर भारत को कांग्रेस मुक्त करके राहुल गांधी दक्षिण की ओर चले हैं।

बेचारी ईवीएम

कांग्रेस हारने के बाद बौद्धिक हिस्टीरिया की शिकार है। नैराश्य में डूबी कांग्रेस को ईवीएम की गड़बड़ी दिखने लगी। गुजरात में उसने ईवीएम से छेड़छाड़ का आरोप लगाया। जब वह जीतती है तब ईवीएम की बात नहीं कहती। हाल में मप्र में कांग्रेस के बंद के दौरान दिग्विजय सिहं भी यही राग अलाप रहे थे।

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