नईदिल्ली. इंडिया डेटलाइन. अहमदाबाद में देश के सबसे बड़े स्टेडियम का शुभारंभ राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने किया  इसके साथ ही इसका नामकरण नरेंद्र मोदी स्टेडियम किया गया है। यह स्टेडियम सरदार पटेल खेल परिसर का हिस्सा होगा इतने बड़े और अत्याधुनिक स्टेडियम की परिकल्पना नरेंद्र मोदी ने तब की थी जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे। किंतु इसे आकार देने वाला कौन है, यह सवाल आपके जेहन में हो सकता है।

लगभग 63 एकड़  क्षेत्रफल में फैले इस स्टेडियम को लार्सन एंड टूब्रो ने 800 करोड़ रुपए  की लागत से बनाया है लेकिन इसका परिकल्पनाकार यानी वास्तुविद कौन है?  यह जानना दिलचस्प है। वास्तुविद अक्सर नींव के पत्थर की तरह छुपे रह जाते हैं।

वैसे यह मानना होगा कि देश के कई बड़े प्रोजेक्ट के वास्तुविद गुजराती है। यह इसलिए नहीं है कि गुजरात के नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री है बल्कि गुजराती वास्तुविदों ने अपने दम पर देशभर में नाम कमाया है। इस समय देश के 3 बड़ी परियोजनाओं के निर्माता गुजराती वास्तुविद हैं। इनमें जहां राम मंदिर का निर्माण कर रहे वास्तुविद सोमपुरा हैं तो वही दिल्ली में बन रहे नए संसद भवन के वास्तुकार विमल पटेल है। गुजरात में ही देश की सबसे बड़ी स्टैच्यू ऑफ यूनिटी राम सुतार ने बनाई है तो वाराणसी का गलियारा भी पटेल बना रहे हैं।

इस स्टेडियम की वास्तु रचना वैसे एंड्रयू जेम्स ने की है लेकिन उनके साथ वास्तुविद शशी प्रभु जोड़ें शशी प्रभु को देश के कई खेल परिसरों की संरचना करने का श्रेय खाते हैं। मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम, नागपुर के वीसीए स्टेडियम, दिल्ली में इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम और हैदराबाद में राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम बनाने में उन्हीं का हाथ था। टाइम्स ऑफ इंडिया ने तो उन्हें ‘मैन ऑफ स्टेडिया’ कहा था।

आपको बता दें कि दुनिया के इस सबसे बड़े स्टेडियम में 1 लाख 10 हजार दर्शकों के बैठने की क्षमता है। इसमें क्रिकेट की ग्यारह पिच बनाई गई हैं। यह दुनिया का एकमात्र स्टेडियम है जिसमें मुख्य और अभ्यास पिचों पर एक सी मिट्टी है। इसमें ऐसा ड्रेनेज सिस्टम लगाया गया है कि बारिश के बाद पानी निकालने के लिए सिर्फ 30 मिनट लगेंगे। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा यह स्टेडियम पर्यावरण के अनुकूल विकास का एक उदाहरण है । प्रेस सूचना ब्यूरो द्वारा जारी सूचना में कहा गया है कि यह ओलंपिक आकार के 32 फुटबॉल स्टेडियमों के बराबर का है।

स्टेडियम तीन भूकंप क्षेत्रों में स्थित है इसलिए इसकी छत का वजन घटाने के लिए हल्के फैब्रिक का इस्तेमाल करने वाली इंजीनियरिंग वाल्टर पी मूरे ने तैयार की है।

 

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