जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद समेत आधा दर्जन दिग्गज कांग्रेसी शुक्रवार को ही जम्मू में पहुंच गए।

 

कांग्रेस में असंतुष्ट नेताओं के समूह जी-23 के नेता अब फिऱ खुलकर सामने आ गए हैं। शनिवार को उन्होंने जम्मू में कार्यक्रम में कांग्रेस के हालात पर खुलकर विचार व्यक्त किए और गांधी-नेहरू खानदान पर संकेतों में प्रहार किए। कहा गया कि यह असली कांग्रेस है। महात्मा गांधी वाली। अब यह समूह देश के अन्य भागों में कार्यक्रम करने जा रहा है। 

नई दिल्ली. इंडिया डेटलाइन. कांग्रेस अपना इतिहास दोहराने के लिए अब तैयार हो गई है। पार्टी के भीतर पार्टी बनाने का आज जम्मू में असंतुष्टों के शक्ति प्रदर्शन के बाद तय हो गया। गत अगस्त में चर्चा में आए ग्रुप-23 नेताओं के जमावड़े ने स्पष्ट कर दिया कि अब वह पैर पीछे नहीं खींचने जा रहा है। भगवा पगड़ियां पहने ये नेता हाल में राज्यसभा से निवृत्त हुए गुलाम नबी आजाद के न्योते पर एकत्र हुए थे और इस अवसर पर राज बब्बर ने कह दिया- जी-23 का मतलब गांधी-23 से है और असली कांग्रेस वही है, महात्मा गांधी वाली। जम्मू से इन नेताओं का काफिला अब देश के दूसरे हिस्सों में जाने वाला है। अगली रैली कुरुक्षेत्र (हरियाणा) में करने का कार्यक्रम है।

कांग्रेस के 23 असंतुष्ट नेता गत अगस्त में पार्टी कामकाज व संचालन की शैली को लेकर चर्चा में आए थे। इन्होंने तब पार्टी के चुनाव का मुद्दा भी उठाया था।  बाद कार्यसमिति की बैठक बुलाकर पार्टी के चुनाव  का कार्यक्रम घोषित कर दिया गया। इसके कुछ दिन बाद तक चुप्पी रही। लेकिन यह खामोशी गुलाम नबी आजाद को राज्यसभा से विदा देते ही टूट गई। जम्मू में शनिवार को एकत्र नेताओं ने गुलाम नबी की विदाई की पीड़ा को साझा किया। गुलाम नबी के पार्टी आलाकमान के खिलाफ मुखर होने के कारण उनका राज्यसभा का कार्यकाल नहीं बढ़ाया गया।

जम्मू में ये नेता अन्य नाम के एक मंच के बैनर तले जुटे थे। समझा जाता है कि ऐसे ही अराजनीतिक मंच के नाम से आगे कार्यक्रम किए जाएंगे। इनसे शशि थरूर व अखिलेश सिंह के भी जुड़ने की संभावना है। इन नेताओं ने जम्मू जमावड़े के लिए ऐसा अवसर चुना जबकि राहुल गांधी दक्षिण राज्यों की यात्रा पर हैं। मंच से राहुल-सोनिया को साफ-साफ इशारे कर पार्टी के प्रति नाराजगी को जाहिर किया गया। कपिल सिब्बल ने कहा कि हम महसूस करते हैं कि कांग्रेस कमजोर हो रही है। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा कि आजाद एक संकल्पित कांग्रेसी नेता हैं। आजाद उन नेताओं में से हैं जो कांग्रेस को समझते हैं।

गुलाम नबी ने कहा कि वे राज्यसभा से ही रिटायर हुए हैं, राजनीति से नहीं। आज कई वर्षों बाद हम राज्य का हिस्सा नहीं हैं। हमारी पहचान खत्म हो गई है।

अभिषेक मनु सिंघवी ने बगावत करने वाले G-23 ग्रुप पर सवाल उठाए

बगावत का झंडा बुलंद करने वाले कांग्रेस नेताओं पर पार्टी नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने सवाल उठाए हैं। सिंघवी ने कहा कि पार्टी का मानना है कि 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव के वक्त उन्हें पार्टी को मजबूत करना चाहिए था।
 जम्मू में बगावत का झंडा बुलंद करने वाले जी-23  ग्रुप के कांग्रेस नेताओं को सिंघवी ने कांग्रेस परिवार का अभिन्न अंग बताया है। हालांकि उन्होंने चुनाव के वक्त नेताओं के इस तरह बगावती तेवर अपनाने को लेकर सवाल भी खड़े किए। अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, गुलाम नबी आजाद के संसद में 7 टर्म गुजारने पर हमें गर्व है। सोनिया गांधी ने कभी उन्हें मुख्यमंत्री बनाया, कभी वो मंत्री रहे, कभी उन्हें महासचिव बनाया गया। जिन्होंने आजाद का इस्तेमाल होने की बात कही है, उन्हें शायद इतिहास पता नहीं है।’
सिघंवी ने बगावत की टाइमिंग को लेकर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी को लगता है कि ऐसे वक्त में जब 5 राज्यों में चुनाव हैं, इन नेताओं को पार्टी को मजबूत करना चाहिए था। उन्होंने आगे कहा कि सभी नेता सम्मानित हैं और वो उनका आदर करते हैं। G-23 से लेकर हार्दिक पटेल तक असंतोष पर वरिष्ठ नेता ने कहा कि पार्टी पिछले कुछ सालों से सत्ता से बाहर रही है, इसे कांग्रेस की कमजोरी कह सकते हैं। लेकिन जैसा कहा जा रहा है, वैसा कुछ नहीं है। 
क्या है भगवा पगड़ियों का राज
कांग्रेस के नेताओं का जम्मू में जाकर भगवा रंग की पगड़ियां धारण करने को लेकर राजनीति में कयासबाजी शुरू हो गई है। इसे भाजपा से जोड़कर देखा जा रहा है। पिछले दिनों गुलाम नबी आजाद को राज्यसभा से विदा देते हुए प्रधानमंक्षी काफी भावुक हो गए थे। गुलाम नबी की उनके साथ खास केमिस्ट्री नजर आई थी। यह समझा जा रहा था कि प्रधानमंत्री गुलाम नबी के माध्यम से काश्मीर में नई राजनीति करना चाहते हैं। काश्मीर में उन्हें बड़ा चेहरा चाहिए। लेकिन वरिष्ठ सूत्र इसे भगवा पगड़ी से जोड़ने को नादानी कहते हैं। एक सूत्र ने कहा कि यदि भाजपा से कोई समझदारी बनेगी तो भी पगड़ी पहनकर उसका प्रदर्शन नहीं किया जाएगा। दूसरे सूत्र ने इसे गांधी परिवार को खिजाने वाला कहा। 

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