नरेन्द्र दुबे

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पखवाड़े भर पहले नर्मदा जयंती के दिन एक सद संकल्प लिया कि वे पूरे साल भर हर रोज एक पौधा लगायेंगे । तब से उनके संकल्प पर अमल हो रहा है । और अपने जन्मदिन दिन से एक दिन पहले यानी 4 मार्च को अपने चाहने वालों ,भाई बहिनों और भांजे भांजियों से उन्होंने अपने अंदाज में अपील की है । श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि ” फूलों के हार , स्वागत द्वार , जय जयकार की जरूरत नहीं है । मेरे जन्मदिन पर केवल एक पौधा लगा दें । जन्मदिन आडंबर से नहीं उपयोगी कार्य से सार्थक होता है । “

 शिवराज जी रोज सुरक्षित स्थानों पर पौधा लगा रहे हैं और सोशल मीडिया पर वाकायदा संबंधित वृक्ष के गुण धर्मों से लोगों को अवगत कराते हैं। वे वृक्षों की उपयोगिता और पर्यावरण संरक्षण के लिए जनता को प्रेरित करने का उपक्रम कर रहे हैं । लोग भाषण उपदेशों से नहीं, बड़े लोगों के कामों को देखकर अनुकरण करते हैं । उस दृष्टि से शिवराज सिंह जी ने वैयक्तिक स्तर पर यह बेहतर काम शुरु किया है । 5 मार्च 1959 को नर्मदा तीरे गांव जैत में पैदा हुए शिवराज नर्मदा जी के भक्त हैं । पुण्य सलिला नर्मदा मैया की जयंती उनके लिए प्रेरणा बनी यह और भी पुनीत रहा । तय है मुख्यमंत्री के संकल्प के तहत रोपे गये पौधों का पालन-पोषण प्राथमिकता से होगा और वे वृक्ष बनकर लोक कल्याण के कारक बनेंगे।

यह प्रमाणित है कि शिवराज सिंह चौहान ही प्रदेश के सबसे बड़े नेता हैं । क्यों कि चौथी बार मध्यप्रदेश का मुख्य मंत्री पद सम्हालने वाले और लगातार सबसे ज्यादा समय इस पद पर रहने वाले वे इकलौते नेता हैं । उनके स्तर का शक्ति संपन्न शासक यदि कोई बेहतर पहल कर रहा है तो उसे एक अभियान की शक्ल मिलना चाहिए। हर जनप्रतिनिधि उनकी ही तर्ज पर सफल पौधारोपण अभियान चलाये तो पूरा प्रदेश हरितिमा से लबरेज़ हो जायेगा ।

याद हो भोपाल अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए देश भर में जाना जाता है । पर नये भोपाल का बेहतरीन संरचनात्मक विकास नगरीय करण , वास्तुकरण और प्राकृतिक रुप से समृद्ध करने का सफल प्रयास तत्कालीन मुख्यमंत्री श्यामाचरण शुक्ल और भोपाल कलेक्टर से लेकर मुख्य सचिव पद तक पहुंचने वाले एम एन बुच साहब ने किया था । मध्यप्रदेश हाऊसिंग बोर्ड उन्ही के दौर में स्थापित हुआ था । नगरों में मास्टर प्लान की योजना भी उसी समय अस्तित्व में आई थी । शुक्ल जी और बुच साहब तो अब स्मृति शेष हैं ।पर पेड़ पौधों और भोपाल के प्राकृतिक सौंदर्य में उनकी स्मृतियां आज भी जीवित हैं ।

दूसरा उदाहरण मुझे संजय गांधी का याद आता है । वह आपातकाल और उसके पहले का समय था ।प्रधानमंत्री का 20 सूत्रीय कार्यक्रम जोरों पर था । वहीं संजय गांधी ने युवा कांग्रेस के जरिये अपना महत्वाकांक्षी 5 सूत्रीय कार्यक्रम जारी किया था । जिसका एक सूत्र वृक्षारोपण था । संजय गांधी की दबंग कार्य शैली के चलते वृक्षारोपण जैसा कार्यक्रम एक हद तक सफल भी रहा। लुटियन क्षेत्र की नई दिल्ली में पथ पर खड़े पुराने जामुन आदि के वृक्ष उसी दौर की उपलब्धि हैं ।

अटल बिहारी वाजपेयी जी द्वारा चलाई गई प्रधानमंत्री सड़क योजना ने प्रभावी कार्य किया और उसी तर्ज पर मुख्यमंत्री सड़क योजना भी अमल में आई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सांसद आदर्श ग्राम योजना जारी की थी । क्यों न मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर्यावरणीय सरोकार की नयी योजना अमल में लायें । हर नगर और कस्बों में मुख्यमंत्री उद्यान की योजना हो । जहां सफल पौधारोपण हो और जिला अधिकारियों और सांसद- विधायक को जिम्मा सौंपा जाये । मुख्यमंत्री जिस योजना को लेकर गंभीर होते हैं, अधिकारी जी जान से काम पर जुटते हैं । विधायकों को भी मुख्यमंत्री की सराहना का अपना महत्व रहता है ।

शिवराज सिंह चौहान इस कार्यकाल में आत्मविश्वास से लबरेज़ हैं और फुल फार्म में हैं । वोटों के गणित से अधिक अब ठोस स्थायी और लोक कल्याण की निधि सौंपने की तैयारी हो । बेहतर है कि वे प्रदेश को ऐसा कुछ स्थायी कर जायें कि पीढ़ियों के काम आये । यूँ भी लाड़ली कन्याओं के आशीष ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है और विघ्न बाधाएं हरी है ।यदि वरुण देव और पेड़ पौधों का वरदान पाने में वे सफल होते हैं तो उत्तम आयुष्य, समृद्ध संतति और उज्ज्वल भविष्य को प्राप्त करेंगे । उनका संकल्प शिव संकल्प बने ।

ह” रोज एक पौधा लगा रहे शिवराज

वे पेड़ बनेंगे जो पौधा हैं आज

संत मानिंद हैं आशीषित करेंगे

सुखी रहो ,समृद्ध हो तुम्हारा राज ”

(लेखक दमोह स्थित वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

 

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