नरेन्द्र दुबे

दमोह.इंडिया डेटलाइन. स्वतंत्रता संग्राम सेनानी दादा खेमचंद्र जी बजाज नहीं रहे । वे 95 वर्ष के थे । बजाजजी के निधन से दमोह जिले के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का यह अंतिम चिराग भी बुझ गया । स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों में वही एक शेष बचे थे । राष्ट्रीय पर्वों पर श्री बजाज की गौरवमयी उपस्थिति रहती थी । वे स्वतंत्रता संग्राम और महात्मा गांधी की स्मृतियों से नव पीढ़ी को अवगत कराते थे ।
बजाजजी के साथ उनके गांव बलेह का नाम जरूर जुड़ता था । ‘ खेमचंद्र बजाज बलेह वाले ‘ । जहां 10 फरवरी 1927 को उनका जन्म हुआ था । बलेह है भी बड़ा प्रतापी गांव । सागर जिले की रहली तहसील का यह गांव सेनानियों के गांव के रूप में जाना जाता है । इस छोटे से गांव के दर्जनों लोगों ने स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया था । लगभग हर घर से एक आदमी शामिल हुआ था । यही हाल पड़ोस के गांव अनंतपुरा का था । इन गांवों की गौरवगाथा राष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित हुई थी । फलतः 1933 में महात्मा गांधी जब मध्यप्रदेश प्रवास पर आये तो वे विशेष रूप से अनंतपुरा और बलेह भी पधारे थे और इस वीर प्रसूता भूमि को प्रणाम किया था । बापू ने अपने उपयोग का चरखा भी गांव अनंतपुरा को भेंट किया था । ऐसी वीर भूमि बलेह के सपूत थे श्री खेमचंद्र जी । उनके पिता श्री कोमल चंद्र बजाज भी आजादी के आंदोलन से जुड़े थे और उन्हीं संस्कारों के वशीभूत खेमचंद्र जी भी बचपन में ही स्वतंत्रता संग्राम की गतिविधियों से जुड़ गए थे ।
1942 में गांधी की आंधी में बहकर खेमचंद्र जी भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय हो गए । गांव के 65 लोग जंगल सत्याग्रह करते पकड़े गये । खेमचंद्र जी सहित 35 सत्याग्रहियों को जेल की सजा हुई । बाकी को छोड़ दिया गया । सजा पाये लोगों में खेमचंद्र जी ही सबसे कम उम्र के सेनानी थे । 1943 में जेल से रिहा हुए ।
स्वतंत्रता संग्राम और महात्मा गांधी के जीवन मूल्य बजाज जी के भी आदर्श बन गये । गांधी और खादी उनके जीवन में आये तो सादगी, सरलता, सच्चाई और राष्ट्र भक्ति जैसे गुण उनके व्यक्तित्व के हिस्सा बन गये । स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन के दौरान हुई जेल यात्रा ने भी उनकी जीवनचर्या ,चिन्तन और मूल्यों को परिष्कृत किया । राष्ट्र सेवा और देश भक्ति उनके जीवन में सर्वोपरि रही ।पूरे जीवन इन्हीं मूल्यों पर चलते रहे । स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और पूर्व मुख्यमंत्री द्वारिका प्रसाद मिश्र, श्यामाचरण शुक्ल, पूर्व सांसद मणि भाई पटेल, पूर्व मंत्री विट्ठल भाई पटेल से बजाज जी के आत्मीय संबंध रहे ।अभी कुछ वर्ष पहले जब श्री प्रहलाद पटेल दमोह से सांसद बने और दादा से परिचय हुआ तो फिर दादा से आत्मीय हो गये ।दादा उनसे बहुत स्नेह करते थे । उनके नशा विरोधी अभियान की सराहना करते थे ।
दादा बजाजजी पारिवारिक, सामाजिक जीवन में प्रगतिशील सोच के पक्षधर रहे और समय के साथ उन्होंने सकारात्मक परिवर्तनों को अपनी स्वीकृति दी। विधवा विवाह और अंतर्जातीय विवाह अब तो सामान्य बात हो गयी है और प्रचलन में है । परन्तु श्री बजाज ने दशकों पहले इन विवाह संबंधों को न केवल स्वीकृति दी वरन अपने परिवार से ही शुरुआत कर समाज सुधार के कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया । दयानंद सरस्वती , राजा राममोहन राय और गांधी जैसे मनीषी समाज सुधारकों की विचारधारा का प्रभाव खेमचंद्र जी के मानस पर रहा है ।
दादा धीरे और मधुर बोलते थे । वे अपनी बातों से हौसला देते थे और सही राह दिखाते थे । उनकी जीवटता और जीजिविषा गज़ब की थी । तीन महिने पहले की ही बात है दादा कोरोना संक्रमित हो गये ।दमोह जिला अस्पताल के कोविड वार्ड में भर्ती हुए । साथ के मरीज और तीमारदारी करने वाले कर्मचारी दादा का आत्मविश्वास देख दंग रह गये । वे सबकी खबर ले रहे थे और हौसला बढ़ा रहे थे । दादा कोरोना को परास्त कर रोग मुक्त हो कर घर पहुंच गये थे । एकदम चंगे हो गये थे और सामान्य जीवन जी रहे थे । 5 मार्च को दोपहर के भोजन के लिए तैयार थे । थाली लग गई । दादा को बुलाया तो जवाब नहीं मिला । कमरे में जाकर देखा तो दादा देह मुक्त हो गये थे । शतायु को मात्र 5 वर्ष शेष रह गये दादा खेमचंद्र जी बजाज अब स्मृति शेष हो गये । आजादी के आंदोलन के सेनानी दादा खेमचंद्र जी बजाज को कृतज्ञ राष्ट्र और समाज की भावपूर्ण श्रद्धांजलि ।

– न्द्द्््द्द्द्द्््द््द्द्््द्द्द्द्््द्द्््द्द्द्द्््द््द्द्््द्द्द

 

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here