नरेन्द्र दुबे

दमोह. इंडिया डेटलाइन.  विधानसभा उपचुनाव में नाम वापसी की आखिरी  तारीख और चुनाव चिन्ह आवंटन के बाद बहुत कुछ तस्वीर साफ हो गई है । कुल 22 प्रत्याशी मैदान में हैं। पर मुख्य मुकाबला कांग्रेस प्रत्याशी अजय टंडन और भाजपा उम्मीदवार राहुल सिंह लोधी के बीच है। चुनाव मैदान में बसपा की अनुपस्थिति से जहाँ कांग्रेस को राहत लग रही है, वहीं भाजपा प्रत्याशी राहुल सिंह के चचेरे भाई वैभव सिंह चप्पल चुनाव चिन्ह लेकर मैदान में हैं और वह राहुल को सिरदर्द बने हैं । तीन राहुल और तीन अजय निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। उन्हें नामराशि की वोट में सेंध के रुप में देखा जा रहा है। शक्ति पुत्र महाराज की भारतीय शक्ति चेतना पार्टी से उमा सिंह लोधी, शिवसेना से राज पाठक, सपाक्स पार्टी से रिचा चौबे और बुन्देलखण्ड क्रांति दल से कमलेश असाटी चुनाव में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। गौंडवाना गणतंत्र पार्टी के उम्मीदवार ने अपना नामांकन वापस ले लिया है ।

गौरतलब है कि गत आम चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर निर्वाचित राहुल सिंह के भाजपा में शामिल होने और विधायक पद से त्यागपत्र देने से उपचुनाव हो रहे हैं । निवर्तमान विधायक राहुल सिंह ही भाजपा उम्मीदवार हैं। कांग्रेस ने अपने पुश्तैनी नेता अजय टंडन पर दांव लगाया है। दोनों दलों की तरफ से चुनावी बिसात बिछ चुकी है । कांग्रेस से पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और भाजपा से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केन्द्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल, प्रदेशाध्यक्ष वी डी शर्मा सहित दर्जनों मंत्री आम सभा कर चुके हैं। मजबूत संगठन के बूते भाजपा जाति बैठकें कर समीकरण साध रही है और बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को काम पर लगाया है। मुख्य दारोमदार मंत्री गोपाल भार्गव को दिया है। उन्हें टिकट से वंचित रहे कद्दावर नेता जयंत मलैया को मनाये रखने और ब्राह्मण वोट साधने का जिम्मा है। खुद वी डी शर्मा दमोह में केम्प कर कमरा बैठकें कर रहे हैं और महिलाओं के बीच प्रदेश मंत्री लता वानखेड़े अपनी टीम के साथ ऐड़ी चोटी का जोर लगा रही हैं। कोरोना काल में चुनाव प्रचार जान पर खेलने जैसा है। पूर्व मंत्री जयंत मलैया प्रचार में सक्रिय थे, पर उनकी धर्मपत्नी डॉ. सुधा मलैया और कुछ साथी नेता कोरोना पाजिटिव हो गये। नतीजतन श्री मलैया को भी क्वारंटीन होना पड़ा है।

कांग्रेस के पास मजबूत संगठन और संसाधन का तुलनात्मक रूप से अभाव है। पर दर्जन भर विधायक और पूर्व मंत्री प्रचार में हाथ बंटाने आ गये हैं। खरगोन के विधायक रवि जोशी पखवाड़े भर पहले से ही प्रभार और मोर्चा सम्हाले हैं। वे लगभग पूरा क्षेत्र घूम आये हैं। भिंड के पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री चौधरी राकेश चतुर्वेदी भी दमोह में डेरा डालकर अपने पुराने परिचितों से संपर्क कर फीडबैक ले रहे हैं और श्री टंडन को जिताने अपील कर रहे हैं।

पर कांग्रेस का पूरा दारोमदार अपने प्रत्याशी अजय टंडन पर ही है श। वे अनुभवी हैं। खुद दो चुनाव दमोह सीट से लड़ चुके हैं। हालांकि उन्हें जीत हासिल नहीं हुई थी। उनके पिता चंद्रनारायण टंडन विधायक और चाचा प्रभुनारायण टंडन विधायक और सांसद रह चुके हैं। 67 वर्षीय अजय टंडन इस बार समीकरण और माहौल अनुकूल पाकर सधे अंदाज में चुनाव लड़ रहे हैं। वे बहुत से पुराने कांग्रेसी नेताओं को अपने पक्ष में सक्रिय करने में कामयाब दिख रहे हैं। अभी तो चुनाव माहौल बनने का आगाज हुआ है। अंजाम के वक्त क्या हालात बनते हैं इस पर चुनाव परिणाम निर्भर होंगे।

(दुबे दमोह के वरिष्ठ पत्रकार हैं।) 

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