नई दिल्ली. इंडिया डेटलाइन.  महिला वकीलों ने देश की न्यायपालिका में महिलाओं के कम प्रतिनिधित्व पर असंतोष जताया है। इसकी अभिव्यक्ति उनकी एक अर्जी से हुई। इसमें कहा गया है कि देश में आजादी के बाद सत्तर सालों में केवल 8 महिलाएं ही सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीश बन सकी हैं और न्यायपालिका में महिला न्यायाधीशों की हिस्सेदारी मात्र ग्यारह प्रतिशत है। इसलिए सर्वोच्च न्यायालय मेधावी महिला वकीलों को न्यायाधीश बनाने पर विचार करे।

सुप्रीम कोर्ट वुमन लाॅयर एसोसिएशन (एससीडब्ल्यूएलए) ने अर्जी दायर कर विभिन्न हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के रूप में नियुक्त करने के लिए सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाली मेधावी महिला वकीलों पर विचार करने के लिए निर्देश देने की मांग की है। इस आवेदन के माध्यम से एससीडब्ल्यूएलए ने मैसर्स पीएलआर प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड बनाम महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड और अन्य के मामले में पक्षकार बनाए जाने की मांग की है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट न्यायाधीश के पदों की रिक्तियों के मुद्दे पर विचार कर रही है। इस मामले में 8 अप्रैल को सुनवाई होनी है।
याचिका में कहा गया है कि देश में अब तक सर्वोच्च न्यायालय में नियुक्त 247 न्यायाधीशों में महिलाएं मात्र 8 रहीं। 25 उच्च न्यायालयों की मुख्य न्यायाधीशों में मात्र एक हिमा कोहली महिला हैं। सुप्रीम कोर्ट जजों में भी एकमात्र इंदिरा बैनर्जी हैं।

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