पुस्तकालय

दुनिया में कई देश और उनके नेताओं की राजनीति व राजनय भौगोलिक सीमाओं व बाध्यताओं के दवाब में होती है। ये वास्तविकताएं ही उनका भविष्य और अस्तित्व तय करती हैं। टिम मार्शल ने दुनिया के दस क्षेत्रों के ऐसे ही तत्वों का अध्ययन कर वैश्विक राजनीति को आंका और उनकी पुस्तक संडे टाइम्स की सर्वाधिक विक्रय वाली पुस्तक बनी। भारत व पाकिस्तान के बारे में इसके अध्याय के संपादित अंश प्रस्तुत हैं-

पुस्तकः प्रिजनर्स ऑफ ज्योग्राफी  (भूगोल के कैदी) लेखकः टिम मार्शल/प्रकाशकः एलियट एंड थॉमसन

भारत और पाकिस्तान के बीच 1900 मील लंबी सीमा है। पाकिस्तान शत्रुता के भाव और नाभिकीय हथियारों से लैस है इसलिए उनके लिए अवांछित रिश्ता कायम रखना जीवन और मौत का सबब रहता है। भारत की आबादी एक अरब  30 करोड़ है जबकि पाकिस्तान की 200  मिलियन। उसकी एक गरीब, अस्थिर और भारत विरोधी देश की पहचान है जबकि भारत उसके बारे में एक खास मनोवृत्ति रखते हुए भी अपने को अन्य कई रूपों में प्रकट करता है- एक बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था के साथ दुनिया की उभरती हुई ताकत और फैलते हुए मध्यवर्ग का देश। हम देख सकते हैं कि भारत आर्थिक और लोकतांत्रिक मापदंडों पर पाकिस्तान से बेहतर साबित हुआ है। दोनों देशों ने चार युद्ध लड़े और कई मुख्य मुठभेड़ें कर डालीं। दोनों देश आग से खेलकर जन्मे हैं और आगामी कोई आग उन्हें नष्ट कर सकती है। भौगोलिक बंधनों के कारण दोनोंं एक दूसरे से बंधे हैं। क्षेत्र के देशों में भाषायी और सांस्कृतिक वैभिन्नय उनकी जलवायु की भिन्नता के कारण है। 

इस उपमहाद्वीप में नदियों के किनारे कई सभ्यताएं पनपीं। कई आक्रामकों ने इस धरती को रौंदा लेकिन वे सच्चे अर्थों में इसे कभी नहीं जीत सके। 1947 में, ऑटोमन साम्राज्य के खत्म होने के ठीक पच्चीस साल बाद जिन्ना ने मुसलमानों के उज्ज्वल भविष्य के वादे पर मुस्लिम होमलैंड नाम पर पाकिस्तान बनवाया। यह भौगोलिक, जनसांख्यिकीय, आर्थिक और सैन्य ताकत में भारत से कमतर था। तमाम वैविध्य और पृथकतावादी आंदोलनों के बावजूद भारत ने मजबूत भारतीय पहचान के साथ धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र की स्थापना की। जबकि पाकिस्तान तानाशाहों और उन लोगों के हाथों में पड़ गया जिनकी निष्ठा राष्ट्र की बजाय अपने-अपने इलाके के प्रति थी। पांच अलग-अलग क्षेत्रों जिनकी भाषा भी पृथक थी, को मिलाकर यह देश बना। लेकिन सच यह है कि यह राज्य तो बन गया, राष्ट्र कभी नहीं बन सका।  एक राज्य के अंदर कई राष्ट्र हैं। देश में आबादी का साठ प्रतिशत पंजाबी बहुल है जबकि बलूचिस्तान पैतालीस प्रतिशत भूभाग के बावजूद अल्पसंख्यक आबादी का प्रांत है। जो खनिज व तेल संपदा से भरपूर है। देश के सरकारी कामकाज की भाषा उर्दू है किन्तु यह सिर्फ उन मुसलमानों की भाषा है जो भारत से गए हैं। सिंधी मानते हैं कि उनके ऊपर पंजाबियों ने वर्चस्व स्थापित कर उन्हें दोयम दर्जे का नागरिक बना दिया है जबकि उत्तर पश्चिम सीमा प्रांत के पश्तूनों ने कभी बाहरी लोगों को अपना शासक स्वीकार नहीं किया। काश्मीर दो देशों में विभाजित है तो बलूचिस्तान में गाहे-बगाहे स्वतंत्रता के स्वर उठते रहते हैं।

बलूचिस्तान बहुत महत्व का प्रांत है। देश का बेहतरीन बंदरगाह ग्वादर इसी प्रांत में है। 1979 में सोवियत संघ ने अफगानिस्तान पर कब्जा करते हुए इसी बंदरगाह पर निगाहें गड़ाई थीं। बाद में चीन इस खजाने को देखकर आकर्षित हुआ और इस क्षेत्र में लाखों डॉलर का निवेश किया। 2015 में पाकिस्तान व चीन ने 46 बिलियन डॉलर से ग्वादर से चीन के सिक्यांग प्रांत तक 1800 मील लंबा कॉरिडोर बनाने का समझौता किया। यहां वह विशेष आर्थिक क्षेत्र व अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बना रहा है। पाकिस्तान इससे बहुत खुश है क्योंकि इससे उसे क्षेत्र में चलने वाले पृथकवादी आंदोलन को कुचलने में मदद मिलेगी। विशेष क्षेत्र की सुरक्षा के नाम पर 25 000 सोनिकों की फौज यहां चीन ने तैनात जो कर दी है। इस्लाम, क्रिकेट, खुफिया सेवाएं, सेना और भारत विरोध पाकिस्तान को एक बनाकर रखती हैं। यदि पृथकतावाद का आंदोलन मजबूत हुआ तो इनमें से एक भी इसे बचा नहीं  सकेगा। 

भारत व पाक के बीच रिश्ते कभी दोस्ताना नहीं होंगे। यदि काश्मीर का कांटा नहीं होता तो हो सकते थे। यदि भारत पाकिस्तान के भीतर के असंतोष को कायम रहने में अपना फायदा देखता है तो पाकिस्तान भारत में अपने समर्थकों को उकसाने के साथ आतंकवादियों के हमले को शह देता रहेगा। काश्मीर पर पूरा नियंत्रण भारत के लिए मध्य एशिया व अफगानिस्तान के लिए एक खिड़की खोलता है। यह पाकिस्तान के चीन जाने वाले रास्ते को बंद करता है जो पाकिस्तान व चीन के रिश्तों को नेस्तनाबूद करने के लिए काफी है। पाकिस्तान चीन से दोस्ती से इतना खुश है कि उसे हिमालय से ऊंचा और सागर से गहरा बताता है लेकिन यह सच नहीं है। हां, अमेरिका को दुखी करने के लिए काफी है। 

पाकिस्तान ने भारत से पांच-पांच लड़ाइयां लड़ीं जिनमें सियाचीन में 22 हजार फुट की ऊंचाई पर लड़ी गई लड़ाई दुनिया के सबसे ऊंचे स्थान पर हुआ संघर्ष था। सच यह है कि पाकिस्तान ने हमेशा भारत की सैन्य ताकत को गलत आंका। नदियों के मामले में भी संवेदनशील स्थिति है। सिंधु नदी हिमालय से निकलकर भारत प्रशासित काश्मीर से बहते हुए पाकिस्तान में जाती है। सिंधु व उसकी सहायक नदियों से दो तिहाई पानी पाकिस्तान को मिलता है। उसका सूती कपड़ा उद्योग इसी पर टिका है। भारत व पाकिस्तान के बीच नदियों को लेकर संधि है और तमाम युद्धों के बावजूद इन्हें निभाया जाता रहा है लेकिन दोनों देशों में खतरनाक ढंग से बढ़ती आबादी और वैश्विक तापमान में वृद्धि पानी के बहाव को प्रभावित कर सकती है। पूरे काश्मीर का अधिग्रहण ही पाकिस्तान को इस समस्या से बचा सकता है लेकिन ऐसा कभी होगा नहीं। 

दोनों देश एक और प्रॉक्सी युद्ध अफगानिस्तान में लड़ रहे हैं। भारत की सीमा से पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद महज 250 किमी दूर है और किसी भी पारंपरिक लड़ाई में भारत की सेना को इस्लामाबाद में घुसने में चंद समय ही लगेगा। पाकिस्तान इसके लिए दो योजनाएं रखता है जिसमें एक अफगानिस्तान में पाकिस्तान समर्थक सरकार बनाना है। दूसरी योजना में पंजाब में भारत की कार्रवाईयों पर निगाह रखना और आपातकाल में राष्ट्रीय राजमार्ग 1 ए को काट देना है जिससे भारत सरहद पर तैनात अपनी सेना को साजो सामान पहुंचाता है। भारतीय सेना 10 लाख से ज्यादा सैनिक हैं जो पाकिस्तान के आकार से ज्यादा हैं। (इंडिया डेटलाइन)

प्रस्तुतिः भूमि श्रीवास्तव

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