पटना. इंडिया डेटलाइन. यह देखते हुए कि बड़े पैमाने पर लोगों को COVID से संबंधित सुविधाओं की उपलब्धता के बारे में अपेक्षित जानकारी नहीं मिल रही है, इस सप्ताह पटना हाईकोर्ट ने राज्य के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को निर्देश दिया था कि वह मीडिया के माध्यम से इस तरह की जानकारी को सार्वजनिक करें और यह सुनिश्चित करें कि,”कम से कम हर दिन एक निश्चित समय पर सरकार की तरफ से एक प्रेस वार्ता की जाए,जिसमें तथ्यों का खुलासा करते हुए कोरोना के मामलों की संख्या, राज्य में विभिन्न स्थानों पर मरीजों को भर्ती करने व उनका इलाज करने के लिए उपलब्ध बुनियादी ढ़ांचे और जनहित में प्रसारित की जाने वाली अन्य आवश्यक जानकारी आम जनता को दी जाए।”
न्यायमूर्ति चक्रधारी शरण सिंह और न्यायमूर्ति मोहित कुमार शाह की खंडपीठ बिहार राज्य में कोरोना के मामलों की खतरनाक स्थिति को देखते हुए दायर की गई याचिकाओं के एक बैच पर विचार कर रही थी। इन याचिकाओं में कोरोना महामारी की दूसरी लहर से उत्पन्न हुई चुनौतियों से निपटने के लिए राज्य में सुविधाओं और स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की कमी के मुद्दे को उठाया गया है। यह देखते हुए कि अखबार की रिपोर्ट राज्य की पूरी स्थिति की ”उदास तस्वीर” को उजागर करती है, अदालत ने कहा कि ऐसी रिपोर्टें ”नागरिकों के मौलिक अधिकारों को छूने वाले जनहित के गंभीर मुद्दों को उठा रही हैं।”

कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को निर्देश दिया था कि वह मीडिया के माध्यम से उपरोक्त जानकारी को सार्वजनिक करें और यह सुनिश्चित करें कि सरकार की तरफ से कम से कम एक सार्वजनिक ब्रीफिंग प्रतिदिन की जाए। कोर्ट ने यह निर्देश देते हुए राज्य के विभिन्न अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी के मुद्दे पर भी ध्यान दिया,जिसके परिणामस्वरूप लोग ऑक्सीजन सिलेंडर खरीदने के लिए परेशान हो रहे हैं। अदालत के अनुसार, उक्त स्थिति ”ऑक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजारी” को बढ़ावा देगी। मामले को आज सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया था अर्थात् 17 अप्रैल को। वहीं प्रतिवादियों को निम्नलिखित करने के लिए निर्देशित किया गया थाः – स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के लिए उठाए गए कदमों और राज्य सरकार द्वारा कोरोना की दूसरी लहर से निपटने व इस तरह की सुविधाओं की उपलब्धता के बारे में आम लोगों को जागरूक करने (ताकि लोगों में मौजूद अनावश्यक घबराहट की भावना को कम किया जा सकें)के लिए तैयार की गई व्यापक कार्ययोजना के बारे में अदालत को सूचित करना। – कोर्ट को बताया जाए कि राज्य सरकार ऐसे व्यक्तियों के लिए क्या प्रावधान कर रही है जो पाॅजिटिव पाए जाते हैं परंतु उनको कोई एसे गंभीर लक्षण नहीं हैं कि उनको अस्पताल में भर्ती करना पड़े।
(लाइव लॉ)

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