भोपाल. इंडिया डेटलाइन. महामारी में भी जो लोग जान जोखिम में डालकर कर्तव्य निभाते हैं, उनमें पत्रकार भी हैं और दर्दनाक यह है कि खतरे से खेलते हुए कई पत्रकारों ने दूसरी लहर में जान गंवा दी है। मैदान में घूम-घूमकर रिपोर्टिंग करते हुए या देर रात तक कार्यालयों में समाचारों के लिए जूझते हुए कोरोना संक्रमित होने के तो सैकड़ों मामले प्रकाश में आ चुके हैं।

राजधानी भोपाल में शुक्रवार को युवा पत्रकार प्रवीण श्रीवास्तव का निधन हो गया। सागर में पत्रकार राजेश इटौरिया ने भी कोरोना से प्राण त्याग दिए। वह दैनिक भास्कर सहित कई अखबारों में काम कर चुके थे। इधर, भोपाल में सांध्य प्रकाश के संपादक संजय सक्सेना खुद तो कोरोना से जंग जीत गए किंतु उनकी धर्मपत्नी संध्या ने जीवन खो दिया। इंदौर में वरिष्ठ पत्रकार रमेश बिंदल की जान चली गई। इसके अलावा दैनिक भास्कर में डेस्क पर काम करने वाले वरिष्ठ उप संपादक महेंद्र साकल्ले भी कोरोना से असमय चले गए। पहली लहर में इंदौर के पत्रकार मनोज बिनवाल की जान गई। प्रदेश की पत्रकारिता से पिछले माह ही एक बड़ा स्तंभ कमल दीक्षित के रूप में ढह गया था। वह नवभारत के वर्षों तक संपादक रहे और सेवानिवृत्ति के बाद प्रजापति ब्रह्माकुमारी विश्वविद्यालय के मूल्यगत मीडिया का दायित्व संभाला।

राजधानी के तकरीबन हर प्रमुख समाचार पत्र के कार्यालय में पांच से पचीस प्रतिशत तक स्टाफ कोरोना से प्रभावित है। एक बड़े समाचार पत्र में किस्तों में पचास से अधिक पत्रकार कोरोनाग्रस्त हो चुके हैं। इनमें एक साथ दस से लेकर बीस कर्मचारियों के एक साथ संक्रमित होने के मामले भी आए। वहीं अन्य अखबारों में भी यही हाल है। एक समाचार पत्र में फ्रंट पेज के दोनों उपसंपादकों व रिपोर्टिंग टीम के दो वरिष्ठ संवाददाताओं के संक्रमित होने के बाद पेज की संख्या घटानी पड़ी है। अन्य समाचार पत्रों में भी आर्थिक व प्रकाशन का संकट मंडरा रहा है।

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दिल्ली में वरिष्ठ पत्रकार राजीव मित्तल को कोरोना की दूसरी लहर ने छीन लिया। वे मप्र में नईदुनिया के संपादक रह चुके हैं। उत्तरप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार विनय श्रीवास्तव की मृत्यु दर्दनाक परिस्थितियों में हुई। लगातार गिरते ऑक्सीजन स्तर की जानकारी ट्वीट करके देते हुए वह सहायता के लिए गिड़गिड़ाते रहे। अंतिम ट्वीट के दस मिनट के भीतर उनकी सांसें टूट गईं। आगरा के वरिष्ठ पत्रकार बृजेंद्र पटेल की भी कोरोना से मृत्यु हो गई।

वाराणसी से एक पत्रकार ने बताया कि दैनिक हिंदुस्तान में दो प्रबंधन कर्मचारियों की कोरोना मृत्यु के बाद दहशत का माहौल है। संपादकीय विभाग का पूरा स्टाफ अब घर से काम कर रहा है। उनका कहना था उप्र में पंचायत चुनाव के कारण कोरोना की भयावह स्थिति हो गई है। चार में से अभी एक चरण ही संपन्न हुआ है। पत्रकारों को भी इसी कारण ज्यादा व्यस्त रहना पड़ रहा है।

जोखिम के बीच पत्रकारिता करने के कारण कई राज्यों में पत्रकारों को फ्रंट लाइन वर्कर्स घोषित करने की मांग की जा रही है। मध्यप्रदेश के जनसंपर्क विभाग ने पत्रकार कल्याण की मद से सहायता करने के लिए कोरोना से मरने वाले पत्रकारों  के संबंधितों से आवेदन मांगे हैं।

 

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